छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : जीवन में परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन है नियम, खुद को बदलो संसार को नहीं…

By kadwaghut|31 Jul 2026, 11:02 AM
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डोंगरगांव , शांतिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर की धर्मसभा में गुरुवार को साध्वी आज्ञांजना जी मसा ने कहा कि नियम में अपार शक्ति है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में छोटा से छोटा नियम अवश्य लेना चाहिए, क्योंकि यही छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़े परिवर्तन लाते हैं। कहा कि शरीर नश्वर है, इसलिए केवल बाहरी सजावट तक सीमित न रहकर संकल्प, नियम और जिनवाणी के अमृत से अपने जीवन को निखारने का प्रयास करना चाहिए।

साध्वीश्री ने कहा कि प्रत्येक धर्म में चातुर्विध संघ की व्यवस्था है और चातुर्मास का यह पावन काल सत्संग रूपी नैया में बैठकर परमात्मा की वाणी को जीवन के रोम-रोम में बसाने का अवसर है। अशुभ विचारों का त्याग कर शुभ विचारों को अपनाने से ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन संभव है। आगम में वर्णित श्रावक के 36 कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है। जितनी अधिक भौतिक सुविधाओं का मोह बढ़ता है, उतने ही कर्मों का बंधन भी बढ़ता है। इसलिए प्रत्येक कार्य करने से पहले उसके परिणाम पर विचार करना चाहिए।

परिवर्तन लाना है तो खुद से शुरुआत करनी होगी मसा ने कहा कि संसार को बदलने का प्रयास निरर्थक है। आज तक कोई भी संसार को नहीं बदल पाया है। यदि परिवर्तन लाना है तो स्वयं से शुरुआत करनी होगी। पूर्व जन्मों के शुभ कर्मों से मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है। यदि इस जीवन में आराधना, स्वाध्याय और सदाचार को अपनाया जाए तो आगामी भव का मार्ग भी सुगम बन सकता है। मनुष्य अपने सांसारिक लाभ-हानि का तो पूरा ध्यान रखता है, लेकिन भव-भव के लाभ और हानि पर विचार नहीं करता।

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