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CG : रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन बाल साहित्य की प्रासंगिकता पर परिचर्चा का आयोजन

By lokesh sharma|25 Jan 2026, 3:33 PM
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विज्ञानसम्मत बाल साहित्य का लेखन अनिवार्य : डॉ. गोपाल दवे

साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं : बलदाऊ राम साहू

रायपुर, रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. गोपाल दवे, बाल साहित्यकार बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया। 

परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. गोपाल दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया। 

बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं। 

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साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।

परिचर्चा के सूत्रधार एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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