छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : वाणी में वह शक्ति है जो होने वाले पाप से पूरी तरह सुरक्षित रखती है: श्रेयांशप्रभ …

By kadwaghut|11 Sep 2026, 10:12 AM
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राजनांदगांव l जैन बगीचा के नए हाल में संवत्सरी पर्व के तीसरे दिन अपने नियमित प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने गुरुवार को कहा कि परमात्मा की वाणी में जीवन का संपूर्ण सार है।

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कल्पसूत्र मूल वाणी है। कहा कि परमात्मा की वाणी हमारे जीवन को तार देती है। इस वाणी में वह शक्ति है जो अतीत, वर्तमान व भविष्य में होने वाले पापों से हमें सुरक्षित रखती है। सर्वाधिक टीका यदि किसी में की गई है तो वह कल्पसूत्र है। किसी को सुनकर उनकी पूरी बातें तो नहीं कम से कम कुछ अंश तो ग्रहण करना ही चाहिए। पूर्व समय में साधु-साध्वियों को सुनकर ही ग्रहण करना पड़ता था, आज तो हम लिखकर भी याद कर सकते हैं फिर हम क्यों नहीं इस जीवन के सार को ग्रहण करते हैं।

कहा कि बुरी बातों को सुनकर हम उसे और विस्तारित कर देते हैं और इसे जल्दी ग्रहण करते हैं किंतु अच्छी बातों को हम और छोटा कर देते हैं और इसे ग्रहण करने में हमें काफी मेहनत करनी पड़ती है। हमारे बहुत सारे ग्रंथों को जला दिया गया। यदि हमने इनका सम्मान किया होता तो आज हमारी सांस्कृतिक विरासत काफी मजबूत होती। जो है उसे ही हम संभालने की कोशिश करें।

तीर्थंकर तो नाम से नहीं बल्कि गुणों से पूजे जाते हैं मुनिश्री ने कहा कि हम अलग-अलग भगवान को देखकर मन बदलते रहते हैं। तीर्थंकर कभी नाम से नहीं पूजे जाते बल्कि गुणों से पूजे जाते हैं। हमें तारने वाला नाम नहीं बल्कि नाम के पीछे जो श्रद्धा है वह है। भगवान महावीर स्वामी कहते हैं कि जो भी बोलना है या करना है उसे सोच समझकर बोलो या करो। भगवान आदिनाथ का कहना है कि पाप तो पाप है चाहे वह जानकर करो या अनजाने में। मुनिश्री ने कहा कि हमें पाप से बचना चाहिए और परमात्मा की वाणी को ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।

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