छत्तीसगढ़

190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण, 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं समाधान विकसित

By Admin|04 Nov 2026, 10:16 PM
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जीआईएस तकनीक से औद्योगिक भूमि चयन, बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगी मदद

रायपुर
छत्तीसगढ़ में सुशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में विकास योजनाओं के बेहतर निर्माण, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा सटीक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के विभिन्न विभागों के 200 से अधिक अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यशाला में राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

जीआईएस आधारित डेटा से योजनाओं के निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती
कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स द्वारा राज्य के लिए 190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण किया जा चुका है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं के अनुरूप 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं उपयोग आधारित समाधान विकसित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी समाधानों के माध्यम से विभागों को उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का निर्माण एवं प्रभावी क्रियान्वयन करने में सहायता मिल रही है।

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कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य चिप्स द्वारा विकसित राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल एवं डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से जिलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को परिचित कराना था। इसके माध्यम से जिला स्तर पर उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का उपयोग कर विकास संबंधी आवश्यकताओं की पहचान और योजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जियो-पोर्टल के उपयोग के लिए चिप्स द्वारा सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।

कार्यशाला में नई दिल्ली से आए ईसरी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट श्री प्रशांत जोशी, हेड ई.आई.सी. श्री पीयूष मिश्रा, ऑक्टेव इंडिया के श्री विवेक चौहान, श्री चंचल मुखर्जी, चिप्स सीईओ मयंक अग्रवाल, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख श्री संदीप टिकरिहा तथा श्री हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

एआई चैट बॉट से आसान होगी भौगोलिक जानकारी तक पहुंच
कार्यशाला का विशेष आकर्षण जियो-पोर्टल पर विकसित नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट फीचर रहा। इस नई सुविधा से उपयोगकर्ताओं के लिए भौगोलिक जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक होगा। अब उपयोगकर्ता जियो-पोर्टल पर किसी भी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति अथवा स्थल का नाम चैट बॉट में लिखकर सीधे संबंधित स्थान तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए उन्हें ड्रॉप-डाउन मेन्यू या लंबी सूची में स्थान खोजने की आवश्यकता नहीं होगी।

 चैट बॉट में स्थान का नाम दर्ज करते ही जियो- पोर्टल का मानचित्र संबंधित स्थान पर नेविगेट करेगा। साथ ही उस स्थान से जुड़ी विस्तृत भौगोलिक जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे। यह सुविधा जियो-पोर्टल को अधिक सरल, सहज और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के साथ ही विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं तेजी से उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।

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औद्योगिक विकास से लेकर बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार तक उपयोगी होगी तकनीक
कार्यशाला में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी देते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा अपनाए जा रहे जीआईएस आधारित समाधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा औद्योगिक भूमि के चयन और नियोजन के लिए 'लैंड पैच एनालिसिस' का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान, उपलब्ध भूमि का डिजिटल विश्लेषण तथा उपयुक्त स्थानों के चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाई जा सकेगी।

इसी प्रकार संस्थागत वित्त संचालनालय (डीआईएफ) द्वारा 'बैंक कवरेज एनालिसिस' के माध्यम से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके आधार पर नई बैंक शाखाएं स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों का निर्धारण किया जा सकेगा। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि भू-स्थानिक तकनीक केवल मानचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विशेषज्ञों ने बताए भू-स्थानिक तकनीक के नवीनतम उपयोग

कार्यशाला के दौरान ईसरी इंडिया (Esri India) एवं ऑक्टेव इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रस्तुतिकरण दी गई।  विशेषज्ञों ने जीआईएस तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों, आधुनिक भू-स्थानिक समाधानों तथा शासन की कार्यप्रणाली में इनके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी साझा की।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने जीआईएस आधारित योजनाओं, डेटा विश्लेषण और विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने के विषय में विचार-विमर्श किया।

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डेटा आधारित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का विस्तार विकास योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल है। भौगोलिक सूचनाओं के एकीकृत उपयोग से विभागों को स्थानीय जरूरतों की पहचान करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में सहायता मिलेगी।

इस पहल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हुए विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। आधुनिक जीआईएस तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

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