राजनांदगांव : यूसीसी की प्रक्रिया पर बौद्ध कल्याण समिति का कड़ा विरोध
अध्यक्ष दीपांकर खोब्रागड़े बोले—ड्राफ्ट सार्वजनिक कर पहले हो व्यापक जनसुनवाई
राजनांदगांव , । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में शासन द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित किए जाने के बीच बौद्ध कल्याण समिति, राजनांदगांव ने प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताया है। समिति ने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और पारिवारिक कानूनों में बदलाव का प्रभाव प्रदेश के विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक वर्गों पर पड़ सकता है। इसलिए व्यापक जनसंवाद के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
समिति अध्यक्ष दीपांकर खोब्रागड़े ने कहा कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 44 से जुड़ा विषय है, लेकिन इसके साथ समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों का भी ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले प्रस्तावित यूसीसी का पूरा ड्राफ्ट सार्वजनिक करे, ताकि नागरिक और सामाजिक संगठन उसके प्रावधानों का अध्ययन कर आपत्तियां एवं सुझाव दे सकें।
ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग
खोब्रागड़े ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित यूसीसी में किन विषयों को शामिल किया जाएगा और मौजूदा कानूनों में क्या बदलाव होंगे। उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर व्यापक जनसुनवाई आयोजित करने की मांग की।
आदिवासी एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं पर अध्ययन जरूरी
समिति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए आदिवासी एवं पारंपरिक समुदायों की विवाह, परिवार, उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी व्यवस्थाओं पर यूसीसी के प्रभाव का विशेष अध्ययन होना चाहिए। खोब्रागड़े ने कहा कि सामाजिक वास्तविकताओं और संवैधानिक संरक्षणों को नजरअंदाज कर बनाया गया कानून अधूरा होगा।
महिला अधिकार और पुराने मामलों पर स्पष्टता हो
समिति ने महिलाओं के उत्तराधिकार, संपत्ति, भरण-पोषण, तलाक के बाद आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की अभिरक्षा जैसे विषयों पर स्पष्ट प्रावधान की मांग की। साथ ही यूसीसी लागू होने के बाद पहले से हो चुके विवाह, लंबित तलाक, पुराने उत्तराधिकार विवाद और अर्जित संपत्ति से जुड़े मामलों के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था स्पष्ट करने की बात कही।
जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक आंदोलन
खोब्रागड़े ने स्पष्ट किया कि समिति का विरोध किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक जनभागीदारी के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यदि यूसीसी के प्रावधान नागरिक अधिकारों या सामाजिक हितों के प्रतिकूल पाए गए तो समिति लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से विरोध करेगी। आवश्यकता पड़ने पर जनजागरूकता अभियान, शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा।
समिति ने सरकार से यूसीसी जैसे व्यापक प्रभाव वाले विषय पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक जनसंवाद, संवैधानिक समीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की अपील की।




