शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि कब, इस बार पूजन के बाद कन्याओं को क्या दें उपहार ?
प्रयागराज: नवरात्र की अष्टमी को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है। कहते हैं नवरात्र के आठवें दिन जो भी भक्त मां की सच्चे मन से आराधना करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं और उसके जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है। देवी के इस स्वरूप का रंग अत्याधिक गोरा है इसलिए उन्हें महागौरी के नाम से जाना गया है। लेकिन शारदीय नवरात्र 2026 में अष्टमी तिथि को लेकर 18 और 19 अक्टूबर दोनों तारीखों को लेकर संशय बना हुआ है।
हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष खास महत्व माना गया है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के हर दिन मां दुर्गा के एक विशेष रूप की आराधना की जाती है। इन दिनों सच्चे मन से मां की पूजा करने और व्रत रखने से देवी दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख समृद्धि आती है। शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर कन्या पूजन किया जाता है। पंडित शिप्रा सचदेव ने न्यूज एजेंसी से कहा, “कुछ जगहों पर सप्तमी के दिन व्रत रखा जाता है और कन्या पूजन अष्टमी को होता है। इस बार सप्तमी 17 और 18 अक्टूबर को पड़ रही है। 17 अक्टूबर को पूरे दिन सप्तमी है, जबकि 18 को 11.36 बजे अष्टमी की शुरुआत हो जाएगी। श्रद्धालु चाहें तो 17 को व्रत रखकर 18 को 11.36 बजे के बाद कन्या पूजन कर सकते हैं। भक्त 18 को भी पूरा दिन व्रत रखकर 19 अक्टूबर को कन्या पूजन कर सकते हैं।
पंडित शिप्रा सचदेव ने कहा, “19 अक्टूबर यानी सोमवार को 7.36 बजे से नवमी की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन अष्टमी और नवमी का कन्या पूजन कर सकते हैं। उदया तिथि के अनुसार, इस बार 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी। इस बार शुक्र अस्त हो चुका है, इसलिए कन्याओं को सुहाग का सामान (रबर, क्लेचर, परफ्यूम) देंगे तो धन वैभव की प्राप्ति होगी। शुक्र का अस्त होना कहीं न कहीं धन संपदा में नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इस बार कन्याओं को फैशन संबंधी उपहार अवश्य दें।”




