छत्तीसगढ़

CG : खैरागढ़ से कवर्धा तक मार्ग जर्जर, गड्ढे होने के कारण बढ़ रहे हादसे, स्कूली बच्चे भी परेशान …

By kadwaghut|17 Sep 2026, 1:10 PM
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छुईखदान l जिला मुख्यालय खैरागढ़ को छुईखदान, गंडई, नर्मदा, लोहारा होते हुए कवर्धा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ा डामर, जलभराव, धूल और अतिक्रमण के कारण लोगों का सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मार्ग पर लगातार दुर्घटनाओं और लोगों की जान जाने की घटनाओं के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर जनता सवाल उठा रही है। यह मार्ग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन है।

ग्रामीणों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और मरीजों को इसी रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। इसके बावजूद सड़क की स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी और स्थायी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। खैरागढ़ से करीब चार किलोमीटर आगे पिपरिया के पास सड़क की हालत बेहद खराब है। सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण मार्ग संकरा हो गया है। वहीं पिपरिया से छुईखदान की ओर बढ़ने पर ढिमरिन कुआं चौक के आसपास बाजार और बढ़ते यातायात के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। खराब सड़क, भीड़ और बारिश के दौरान जलभराव वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।

ढिमरिन कुआं से छुईखदान तक तो जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई देते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा हो गया है। कई स्थानों पर यातायात नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड लगाए जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि बैरिकेड लगाने से सड़क के गड्ढे कब भरेंगे? जनता को सुरक्षित सड़क चाहिए, केवल यातायात व्यवस्था के नाम पर औपचारिक कार्रवाई नहीं।

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छुईखदान से नर्मदा चौक, गंडई, लोहारा होते हुए कवर्धा तक जाने वाले मार्ग की स्थिति भी कई स्थानों पर बेहद खराब बताई जा रही है। इस मार्ग पर लगातार आवागमन करने वाले लोगों का कहना है कि तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले समय में दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि सड़क की बदहाली के कारण लगातार दुर्घटनाएं होने और कई लोगों की जान जाने की घटनाओं के बावजूद समस्या को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। आखिर प्रशासन कब जागेगा। विभिन्न विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए फाइलों और कागजी कार्रवाई का सहारा लेते नजर आते हैं। कोई विभाग सड़क को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताता है तो कोई मरम्मत की प्रक्रिया चलने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। नागरिक का सवाल सीधा है-जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

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