राजनांदगांव साहू समाज में अब शादियां गोधूलि बेला में कराने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही सामाजिक आयोजनों में होने वाले अनावश्यक खर्च और कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए मृत्यु भोज में पक्का कलेवा करने की प्रथा पर पूर्ण रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। भोजन में सिर्फ मेहमानों के लिए चावल, दाल व सब्जी रहेगी।
इसे पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। वहीं समाज में आदर्श विवाह को बढ़ावा देने के लिए जिले की प्रत्येक तहसील को कम से कम 10 जोड़ों का लक्ष्य दिया गया है। ये महत्वपूर्ण फैसले जिला साहू संघ की द्वितीय बैठक में लिए गए। साहू सदन में जिला अध्यक्ष नोबल साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले के विभिन्न परिक्षेत्र और तहसीलों से पहुंचे अध्यक्ष-सचिवों ने समाजहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में अंतरजातीय और सगोत्र विवाह से जुड़े मामलों के लिए भी व्यवस्था तय की गई।
दूसरे समाज से आई महिला का भी सम्मान बैठक में सामाजिक समरसता से जुड़ा अहम निर्णय लेते हुए तय किया गया कि अन्य समाज से साहू समाज में आई महिला के निधन की स्थिति में उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और सामाजिक गरिमा के साथ किया जाएगा। इसके अलावा गांव और परिक्षेत्र स्तर की सामाजिक बैठकें दिन में आयोजित करने पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक सामाजिक बंधु इनमें शामिल हो सकें।
विवाह प्रमाण-पत्र और संबंधता कार्ड पर भी चर्चा सामाजिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए सगाई और विवाह प्रमाण-पत्र गांव, परिक्षेत्र एवं तहसील स्तर से जारी करने पर चर्चा हुई। सामाजिक संबंधता शुल्क और सामाजिक संबंधता कार्ड बनाए जाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही सामाजिक एकता, अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ साहू संघ की नियमावली (बायलॉज) का पालन करने का निर्णय लिया है।
