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राजनांदगांव : जैन धर्म व्यक्ति नहीं, गुणों की पूजा सिखाता है: आज्ञांजना जी…

By lokesh sharma|03 Aug 2026, 12:16 PM
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डोंगरगांव , शांतिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में चातुर्मास के तहत नियमित सुबह की धर्मसभा में साध्वी आज्ञांजना जी मसा ने कहा कि जैन धर्म किसी व्यक्ति, जाति या कुल का धर्म नहीं है। यह गुणों की आराधना का धर्म है। जहां सद्गुण होते हैं, वहां सम्मान होता है। राग-द्वेष से ऊपर उठकर समभाव, सेवा, आत्मचिंतन का जीवन आत्मकल्याण का रास्ता खोलता है।

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उन्होंने आचार्य हेमचंद्र और राजा कुमारपाल का प्रसंग सुनाया। कहा कि आचार्य हेमचंद्र ने दूरदृष्टि, समन्वय की सोच से राजा के मन में धर्म के प्रति श्रद्धा जगाई। उन्होंने संस्कृत श्लोक के जरिए संदेश दिया कि राग-द्वेष से रहित गुणों को नमन करना ही सच्ची उपासना है। इसी समभाव से आगे चलकर राजा कुमारपाल के जीवन में आध्यात्मिक बदलाव का मार्ग बना। साध्वी ने कहा कि जैन शास्त्रों में साधना, आचरण को खास महत्व दिया गया है। जैसा आचरण होता है, वैसे विचार बनते हैं। इसलिए अच्छे लोगों का संग जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति स्वार्थ, सीमित दायरे में सिमट रहा है।

चोरी और निंदा के साथ ही असत्य से बचने की जरूरत उन्होंने चोरी, निंदा, असत्य से बचने की बात कही। कहा कि व्यक्ति रोज व्यापार, कामकाज का हिसाब करता है। आत्मा का लेखा-जोखा भूल जाता है। जैसे घर, व्यापार की नियमित सफाई होती है, वैसे ही आत्मा पर जमा विकार भी हटाने चाहिए। परमात्मा की आराधना, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण का सहारा लें।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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