छत्तीसगढ़

गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’

By Admin|20 Sep 2026, 11:16 PM
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रायपुर

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है।

स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी

मती सुमन लता वाकरे आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।

सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह

समूह के माध्यम से मती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया।

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व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।

‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा

मती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल

मती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं।

सेवा संकल्प अभियान में सुमन लता की कहानी बनी प्रेरणा

सेवा संकल्प अभियान के परिप्रेक्ष्य में सुमन लता वाकरे की सफलता की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। यह कहानी बताती है कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब लाभार्थी उन्हें अवसर में बदलकर अपनी मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करते हैं।

गुदुमदेवरी की सुमन लता आज केवल अपने परिवार के लिए आय का मजबूत आधार नहीं बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि संगठित प्रयास, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

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