रिपोर्ट में कमजोर तैयारी और 12वीं के परिणाम को बताया आधार, प्राध्यापक की भूमिका पर चुप्पी का आरोप
राजनांदगांव। शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय में प्रथम सेमेस्टर के गणित विषय का परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गणित विषय की परीक्षा में शामिल 48 विद्यार्थियों में से केवल 4 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि 44 विद्यार्थियों को ATKT मिली है। करीब 92 प्रतिशत विद्यार्थियों का परिणाम खराब होने के बाद एनएसयूआई ने महाविद्यालय प्रशासन और जांच समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।
परीक्षा परिणाम को लेकर एनएसयूआई छात्र संगठन ने पूर्व में धरना-प्रदर्शन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों के कमजोर परीक्षा प्रदर्शन और परीक्षा की तैयारी में कमी को बड़ी संख्या में ATKT आने का प्रमुख कारण बताया है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन में संतोषजनक अंक मिले, लेकिन सेमेस्टर परीक्षा में उन्हें बेहद कम अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही कक्षा 12वीं में गणित विषय के परिणाम को भी आधार बनाते हुए कहा गया है कि अपेक्षाकृत कमजोर शैक्षणिक प्रदर्शन वाले विद्यार्थियों में गणित विषय में ATKT की संभावना अधिक रही।
जांच समिति के इसी निष्कर्ष पर एनएसयूआई प्रदेश संयुक्त महासचिव राजा यादव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी महाविद्यालय में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं, तो वर्तमान परीक्षा परिणाम के लिए कक्षा 12वीं के अंकों को आधार बनाना उचित नहीं है।
राजा यादव ने कहा, “यदि महाविद्यालय का कोई विद्यार्थी टॉपर बनता है तो उसकी सफलता का श्रेय विद्यार्थियों के साथ प्राध्यापकों और महाविद्यालय को भी दिया जाता है। लेकिन जब 48 में से 44 विद्यार्थियों का परिणाम खराब आया है, तो पूरी जिम्मेदारी विद्यार्थियों पर डालना उचित नहीं है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में संबंधित प्राध्यापक द्वारा ली गई कक्षाओं, पाठ्यक्रम पूरा कराने, कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने और परीक्षा की तैयारी कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। संबंधित प्राध्यापक से पूछताछ या उनकी जिम्मेदारी तय किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।

एनएसयूआई ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन, कक्षाओं की उपस्थिति और प्राध्यापक की क्लास डायरी की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
एनएसयूआई ने जांच रिपोर्ट का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि विद्यार्थियों के साथ न्याय नहीं होने पर संगठन आगे भी आंदोलन करेगा।
प्राचार्य ए.एन. माखीजा ने कहा, “जांच समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट तथ्यों और विभिन्न बिंदुओं के आधार पर बनाई गई है। रिपोर्ट तैयार करते समय छात्रों के परीक्षा प्रदर्शन सहित सभी संबंधित पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण किया गया है। जांच निष्पक्ष तरीके से की गई है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए हैं।”
