उत्तर प्रदेशराज्‍य

जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनें युवा, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने पर मुख्यमंत्री का जोर

By Admin|07 Jun 2026, 10:06 PM
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लखनऊ

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 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी स्टार्टअप गंतव्य बनाने के लिए नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति, विशाल बाजार, तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल एवं औद्योगिक आधार तथा निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण राज्य को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं। नई नीति ऐसी होनी चाहिए जो प्रदेश के युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाए और उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप तथा नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान प्रदान करे।

रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा की। प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि पिछले वर्षों में प्रदेश ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। वर्ष 2018 में ‘एस्पायरिंग लीडर’ श्रेणी से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश वर्ष 2025 में भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में ‘टॉप परफॉर्मर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त कर चुका है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप्स को प्रारंभिक चरण से लेकर विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नीति में भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता तथा पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़े प्रोत्साहनों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों तथा पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्र के स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए भी उपयुक्त प्रावधान शामिल किए जाएं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उन्हें उत्कृष्ट एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों, निवेशकों, उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थानों से जोड़ा जाना चाहिए। नई नीति में ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएं, जिनसे स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग और नए बाजारों तक पहुंच प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थ-टेक तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। इसके लिए डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया जाए तथा अनुसंधान आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाई जाए तथा उन्हें भविष्य की उन्नत प्रौद्योगिकियों के अनुरूप विकसित किया जाए। विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर नवाचार को प्रयोगशालाओं से बाजार तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने लखनऊ और नोएडा में प्रस्तावित यू-हब को डीप-टेक नवाचार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किए जाने पर भी बल दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन इसे और अधिक सुदृढ़, संगठित तथा परिणामोन्मुख बनाने के लिए एक समर्पित संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप गतिविधियों के संचालन, प्रोत्साहन, वित्तीय प्रबंधन, निगरानी, क्षमता निर्माण तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का गठन आवश्यक है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित मिशन नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश में स्टार्टअप नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का माध्यम बनेगा। इससे युवाओं को अपने नवाचारों को उद्यम में बदलने के लिए बेहतर सहयोग मिलेगा और वे रोजगार तलाशने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाले बन सकेंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि मिशन को पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था के साथ संचालित किया जाए, ताकि प्रदेश में एक मजबूत और समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो सके।

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