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टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश: संदिग्ध आतंकी के खुलासों से मिशन-2047 की साजिश उजागर, ATS खंगाल रही कड़ियां

By Admin|22 Jun 2026, 4:01 PM
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भोपाल 

मध्यप्रदेश में आतंकी नेटवर्क के खुलासे के बाद गिरफ्तार किए गए इजहार उल हक ने खुलासा किया है कि ये लोग पाकिस्तानी आतंकी ग्रुप से जुड़े हुए थे और मिशन 2047 पर काम कर रहे थे।

एटीएस की जाँच के दौरान आतंकी ने माना है कि सभी आतंकी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स, जैसे-व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में थे। इनका उद्देश्य देशभर में नेटवर्क खड़ा करना, युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में तैयार करना था।

इसके तहत पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के एजेंडे को साल 2047 तक देश में लागू करना मुख्य मकसद था। एटीएस के अनुसार, इस एजेंडे का उद्देश्य देश में कट्टर इस्लामिक कानून लागू करना बताया गया है।

पूछताछ में इजहार ने बताया कि देशभर में तैयार हो रहे उनके कथित मुजाहिद्दीन समय आने पर एक साथ बाहर आएंगे और शासन को उखाड़ फेंकेंगे। यह भरोसा उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिलाया था। उन्हें शपथ दिलाई गई थी कि समय आने पर उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करने जैसे काम करने होंगे।

इनका मकसद ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ यानी PFI के ‘मिशन-2047’ के लिए काम कर रहे थे। एटीएस के मुताबिक, पीएफआई का मकसद साल 2047 तक देश में इस्लामी कानून लागू करना है।

पूछताछ में इजहार उल हक ने बताया है कि वक्त आने पर सभी आतंकी एक साथ बाहर आएँगे और शासन को उखाड़ फेकेंगे। उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करना है।

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सदस्यों के काम करने के तरीके पर पूछताछ जारी
बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार इजहार उल हक से पूछताछ में कथित नेटवर्क की भूमिका और उसके सदस्यों के काम करने के तरीके को लेकर जानकारी मिली है।

एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे और किस स्तर तक इसकी गतिविधियां फैली हुई थीं। तमाम जानकारियां हासिल करने के लिए एटीएस ने इजहार को 22 जून तक रिमांड पर लिया हुआ है।

पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कहा- जिहादी बनो, शहादत मिलेगी
फराज से पूछताछ में सामने आए इनपुट के मुताबिक सभी संदिग्ध कथित तौर पर पाकिस्तानी वॉट्सएप ग्रुप के संपर्क में थे। जांच के अनुसार, फराज पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर अन्य युवकों को जोड़ने का काम शुरू कर चुका था। इसका मकसद युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना था। एटीएस की पूछताछ में फराज ने इसकी पुष्टि की है।

नईम के संपर्क में रहा था फराज
पूछताछ में फराज ने बताया कि वह पिछले 5-6 सालों से देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था। नईम ने ही फराज और बिहार निवासी संदिग्ध आतंकी का परिचय कथित पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था।

हैंडलर्स ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के नाम पर प्रभावित किया और वीडियो कॉल के जरिए शपथ दिलाई कि वह सच्चा जिहादी बनेगा। हैंडलर्स द्वारा दिए गए कामों को अंजाम तक पहुंचाएगा और जिहाद के रास्ते पर चलते हुए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा।

भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान के लोगों से संपर्क
चारों संदिग्धों ने पूछताछ में टेलीग्राम और वॉट्सएप ग्रुप के जरिए भारत और पाकिस्तान में नेटवर्क से जुड़े सक्रिय लोगों के संपर्क में रहने की बात स्वीकार की है।

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फराज को सोशल मीडिया ग्रुप में 'खालिद सैफुल्ला' के नाम से जाना जाता था। हैंडलर्स ने कथित तौर पर लोगों में भय पैदा करने और समय आने पर बताए गए टारगेट पर कार्रवाई करने का टास्क दिया था।

गौरतलब है कि इजहार उल हक को बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार किया गया था। जबकि मोहम्मद फराज को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उसे खालिद सैफुल्लाह नाम से पाकिस्तानी हैंडलर ने लश्कर कमांडर के तौर पर पेश किया था। उसका काम स्लीपर सेल तैयार करना था।

इसी तरह नईम अब्दुल्ला यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। वह मोम्मद फराज को ऑनलाइन ग्रुप से जोड़ा था। आरोपितों के पास से संदिग्ध डिजिटल दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई थी, जिसकी फोरेंसिक जाँच चल रही है।

फराज को दिए थे पासपोर्ट बनवाने के निर्देश
हैंडलर्स ने फराज को पासपोर्ट बनवाने के निर्देश भी दिए थे। उसे भरोसा दिलाया गया था कि किसी अन्य देश के रास्ते पाकिस्तान बुलाया जाएगा, जहां उसे मुजाहिदीन बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एटीएस की दबिश के दौरान फराज के कमरे से मिली जिहादी सामग्री की जांच की जा रही है।

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