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CG: जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय

By kadwaghut|11 Jan 2026, 11:11 PM
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प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका

जनजातीय गौरव पथ’ के निर्माण और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा

गौरा पूजा एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय की सहभागिता

रायपुर, 11 जनवरी 2026

प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन तथा बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का अपना गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराएं हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने तथा इस मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया था ताकि यहां की सर्वाधिक जनसंख्या वाले आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए 15 नवंबर शहीद बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करते हुए धरती आबा उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास के दायरे में लाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए राज्य में प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी वनवासी कल्याण आश्रम में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आदिकाल से भगवान गौरागौरी के रूप में शिव-पार्वती के उपासक रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों के योगदान को स्मरणीय बनाने, उनकी स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जिसमें महापुरुषों की जीवन-गाथाओं का सचित्र वर्णन किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। साथ ही सरना स्थलों का संरक्षण किया जाएगा, जो न केवल सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करेगा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।उन्होंने कहा कि जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में विकसित कर पर्यटन के रूप में नई पहचान दी जा रही है।

कार्यक्रम में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी श्री पनतराम भगत एवं श्री बीरबल सिंह ने भी संबोधन दिया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री श्री ननकी राम कंवर, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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