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CG Crime News: रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर से 1.28 करोड़ की ठगी, मुंबई क्राइम ब्रांच अफसर बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, फिर ऐसे लगाया चूना

By lokesh sharma|19 Jan 2026, 10:38 AM
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रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराध का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर से करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पहले मानसिक दबाव बनाया, फिर गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर अलग-अलग खातों में मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली। जब पीड़ित को पूरे मामले की सच्चाई समझ में आई, तब उन्होंने विधानसभा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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यह मामला रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित का नाम स्वपन कुमार सेन, उम्र 74 वर्ष, निवासी स्वर्णभूमि आमासिवनी बताया गया है। स्वपन कुमार सेन पेशे से रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर हैं और सेवानिवृत्ति के बाद शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन साइबर ठगों ने उनकी सादगी और कानून के प्रति सम्मान का फायदा उठाकर उन्हें एक बड़ी ठगी का शिकार बना लिया।

पीड़ित द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 12:15 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। बातचीत की शुरुआत बेहद गंभीर और सख्त लहजे में की गई, जिससे पीड़ित तुरंत डर गया। आरोपी ने कहा कि डॉक्टर साहब, आपके खिलाफ एक गंभीर एफआईआर दर्ज की गई है।

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आरोपी ने आरोप लगाया कि पीड़ित के नाम से क्रेडिट कार्ड के जरिए कई लोगों से धोखाधड़ी और अवैध वसूली की गई है। इसके बाद उसने कहा कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़ा है, इसलिए कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। इसी दौरान आरोपी ने “डिजिटल अरेस्ट” शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक डॉक्टर को किसी से संपर्क नहीं करना चाहिए और जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन करना होगा।

ठग ने जांच के नाम पर पीड़ित से उनके बैंक खातों, एफडी और वित्तीय स्थिति की जानकारी मांगी। आरोपी की बातों और गिरफ्तारी के डर से घबराए रिटायर्ड डॉक्टर ने अपनी बैंक पासबुक और एफडी की जानकारी व्हाट्सएप पर भेज दी। यहीं से ठगी की असली शुरुआत हो गई।

इसके बाद 3 जनवरी 2026 को फिर से आरोपी का फोन आया। इस बार उसने कहा कि अगर जांच और गिरफ्तारी से बचना है, तो बताए गए खाते में 34 लाख रुपये जमा करने होंगे। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि यह रकम जांच पूरी होने के बाद लौटा दी जाएगी। डरे-सहमे डॉक्टर ने बिना किसी से सलाह लिए आरटीजीएस के माध्यम से 34,00,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

पहली रकम मिलने के बाद ठगों का हौसला और बढ़ गया। 13 जनवरी 2026 को फिर से फोन कर आरोपी ने कहा कि जांच में नया मोड़ आया है और अब एक दूसरे खाते में 39 लाख रुपये और जमा करने होंगे। आरोपी ने यह भी कहा कि अगर रकम नहीं भेजी गई तो तुरंत गिरफ्तारी कर ली जाएगी। मानसिक दबाव और डर के चलते पीड़ित ने इस बार भी ठग के बताए खाते में 39,00,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

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इसके बाद 16 जनवरी 2026 को एक बार फिर आरोपी का फोन आया। इस बार उसने कहा कि यह अंतिम प्रक्रिया है और केस को पूरी तरह से खत्म करने के लिए 55 लाख रुपये और जमा करने होंगे। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि इसके बाद जांच बंद हो जाएगी और कोई कार्रवाई नहीं होगी। लगातार धमकियों और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बनाए गए डर के कारण पीड़ित ने यह रकम भी जमा कर दी।

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इस तरह अलग-अलग तारीखों में पीड़ित से कुल 1 करोड़ 28 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। इसके बाद भी जब आरोपी लगातार फोन कर और पैसों की मांग करने लगा, तब जाकर पीड़ित को संदेह हुआ। उन्होंने अपने जानकारों से बातचीत की और पता चला कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं होता।

सच्चाई समझ में आते ही रिटायर्ड डॉक्टर ने तुरंत विधानसभा थाने पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धारा 173 बीएनएसएस के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। मामले की जांच साइबर सेल की मदद से की जा रही है और ठगों के बैंक खातों व मोबाइल नंबरों की जानकारी खंगाली जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर ठगों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों का उदाहरण है। आम लोगों को डराकर, कानून का नाम लेकर और डिजिटल अरेस्ट जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर ठगी की जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच का अधिकारी फोन या व्हाट्सएप कॉल पर पैसे नहीं मांगता।

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यदि किसी को इस तरह का कॉल आता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। न तो अपनी बैंक डिटेल साझा करें और न ही किसी खाते में पैसा भेजें। तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।

यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ लोगों के डर और भरोसे को भी हथियार बना रहे हैं। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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