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396 मतदाता, दो वार्ड और फिर भी नहीं हुई वोटिंग, राजस्थान के गांव ने पेश की भाईचारे की मिसाल

By Admin|30 Oct 2026, 3:51 PM
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बांसवाड़ा
पंचायती राज चुनाव में जहां वार्ड पंच बनने के लिए उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है, वहीं गनोड़ा तहसील की भुवासा ग्राम पंचायत का सज्जन सिंह का गड़ा गांव आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। गांव में वर्ष 1952 से अब तक वार्ड पंच के चुनाव में मतदान की नौबत नहीं आई। ग्रामीण आपसी सहमति से ही अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और निर्विरोध वार्ड पंच घोषित करते हैं। राजपूत और आदिवासी समाज के लोग एक जाजम पर बैठकर यह फैसला करते हैं, जिस पर गांव के सभी लोग सहमति जताते हैं।

सामान्य और एसटी सीट पर भी कायम है सहमति
गांव की परंपरा के अनुसार वार्ड पंच की सीट सामान्य हो या अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित, दोनों समाजों के लोग आपसी विचार-विमर्श के बाद उम्मीदवार का चयन करते हैं। इस प्रक्रिया में आपसी समझाइश को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे चुनाव में आमने-सामने की स्थिति नहीं बनती। आजादी के बाद से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है।

एक वार्ड से बढ़कर हुए दो, दोनों में निर्विरोध चयन
पहले गांव में एक ही वार्ड था, लेकिन जनसंख्या के आधार पर अब दो वार्ड बनाए गए हैं। इस बार वार्ड संख्या एक, जो सामान्य वर्ग के लिए है, उसमें तारा कुंवर को वार्ड पंच चुना गया है। वहीं, वार्ड संख्या दो, जो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है, उसमें लसी देवी को निर्विरोध वार्ड पंच चुना गया है। गांव के वार्ड संख्या एक में 192 और वार्ड संख्या दो में 204 मतदाता हैं। इस तरह दोनों वार्डों में कुल 396 मतदाता हैं, लेकिन आपसी सहमति के चलते मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।

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दोनों वार्डों में निर्विरोध चयन के बाद ग्रामीणों ने गांव के चौराहे पर तारा कुंवर और लसी देवी का माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान जयपाल सिंह, पर्वत सिंह, देवीलाल, गहू लाल, छत्र सिंह, संग्राम सिंह, जय सिंह, भीमजी भाई, नाथू भाई, शार्दुल सिंह, शंकर, कालू सिंह, मोती सिंह, सज्जन सिंह, लेखराज सिंह, रणवीर सिंह, धुला भाई, गहू भाई और मोहन सिंह सहित ग्रामीण मौजूद रहे।

छोटे-बड़े विवाद भी गांव की चौपाल पर सुलझाते हैं ग्रामीण
गांव में छोटे-बड़े विवाद होने पर भी लोग पहले आपस में बैठकर समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। बातचीत और समझाइश के जरिए विवाद सुलझाने की परंपरा ने आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत बनाए रखा है।

 

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