छत्तीसगढ़

नक्सलियों पर कड़ा प्रहार: कांकेर मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, ACM ढेर

By Admin|13 Apr 2026, 2:06 PM
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कांकेर.

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. जवानों ने इस मुठभेड़ में बड़े कैडर की एक महिला नक्सली को मार गिराया है. मारी गई महिला माओवादी की पहचान ACM रैंक कमांडर रंगाबोइना भाग्या उर्फ रूपी के रूप में हुई है, जो बस्तर इलाके में बड़े कैडर की आखिरी नक्सली मानी जा रही है. रूपी पर 4 लाख रुपए का ईनाम घोषित है. एसपी निखिल राखेचा ने इसकी पुष्टि की है.

जानकारी के मुताबिक, सर्चिंग पर निकलने जवानों पर माचपल्ली के जंगलों में अचानक फायरिंग हुई. जवाबी कार्रवाई में एसीएम रैंक की महिला नक्सली रूपी को ढेर कर दिया गया. रूपी डीकेएसजेडसी सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी. विजय रेड्डी मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 2025 में हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था. रूपी बस्तर क्षेत्र के माड़ डिवीजन में में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडर थी. साल 2004 यानी 24 साल पहले  माओवादी संगठन के साथ जुड़ी थी. मुठभेड़ स्थल की सर्चिंग के दौरान मृत महिला माओवादी के शव के साथ एक पिस्टल हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की गई है. इलाके में सुरक्षाबलों ने सर्चिंग जारी है.

कांकेर पुलिस अधीक्षक जिला निखिल राखेचा ने बताया कि जिला कांकेर के छोटेबेठिया–परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके में स्थित माचपल्ली–आरामझोरा–हिडूर क्षेत्र के जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की आसूचना के आधार पर पुलिस बल द्वारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था. सर्च अभियान के दौरान पुलिस बल और माओवादियों के बीच माचपल्ली इलाके में मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ के पश्चात सर्चिंग के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा एक महिला माओवादी कैडर का शव बरामद किया गया.

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मुख्यधारा में लौटे नक्सली, बस्तर रेंज IG की अपील
बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने कहा कि माओवादी कैडरों के सामने आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर देते हुए शासन की ओर से लगातार अपील की जाती रही है, जिसके प्रभाव से विगत महीनों में काफी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने पुनर्वास का मार्ग अपनाया है. किंतु रूपी जैसे कुछ कैडरों ने पुनर्वास के मार्ग को छोड़कर हिंसात्मक रास्ता अपनाया, जिसका परिणाम आज उनके अंत के रूप में सामने आया है. आईजीपी बस्तर ने शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से अपील की कि उनके पास अब बहुत सीमित समय शेष है. वे सभी हिंसा के मार्ग को त्यागें और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें.

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