CG : जिंदगी के बाद भी काम आएगी ये देह: आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक दंपत्ति ने लिया देहदान का ऐतिहासिक संकल्प …
महासमुंद : गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के पावन अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत आयोजित रक्तदान, अंगदान एवं देहदान के लिए आयोजित शिविर में आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक दंपत्ति, निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक ने समाज के सामने एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। तुमगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इस दंपत्ति ने मरणोपरांत अपना शरीर दान (देहदान) करने का संकल्प पत्र भरा। उनका यह कदम न सिर्फ युवाओं के लिए एक नई सीख है, बल्कि समाज को यह भी बताता है कि जीवन के बाद भी मानवता की सेवा कैसे की जा सकती है।
जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी समाज को समर्पण
महासमुंद जिले में निलेश खांडे और चित्ररेखा तारक की पहचान बेहद कर्मठ और बच्चों के प्रति समर्पित अधिकारियों के रूप में होती है। विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ-साथ, छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं के प्रति उनका असीम स्नेह जगजाहिर है। इस दंपत्ति ने यह साबित कर दिया है कि वे जीते जी ही नहीं, बल्कि अपनी मृत्यु को भी समाज और विज्ञान के लिए उपयोगी बनाना चाहते हैं। इनके द्वारा पूर्व में भी नेत्रदान का संकल्प जीवन दीप समिति जांजगीर के समक्ष की जा चुकी है। साथ ही नीलेश खांडे ने अब तक 47 बार एवं चित्ररेखा ने 6 बार रक्तदान कर कई जरूरतमंद को जीवन जीने में सहायता की है।
दंपत्ति के इस साहसिक, शाश्वत और परोपकारी निर्णय की प्रशासनिक अमले ने भी खुले दिल से प्रशंसा की है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शिल्पा साय सहित अन्य जिला अधिकारियों ने इस कदम को मानवता के लिए अत्यंत सराहनीय बताया। निश्चित तौर पर, निलेश और चित्ररेखा का यह फैसला जिले और प्रदेश में देहदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करेगा और सैकड़ों लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित करेगा।


