छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

Rajnandgaon: एक और ‘दरबार’, सियासी हलकों में शुरू हुई नई चर्चा – दरबार की राजनीति: जनता से मेल-मुलाकात या टिकट की तैयारी?

By kadwaghut|12 Jun 2026, 3:40 PM
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राजनांदगांव। राजनांदगांव की राजनीति में इन दिनों “जनता दरबार” चर्चा का नया केंद्र बन गया है। महापौर मधुसूदन यादव द्वारा पहले से ही जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी जा रही हैं। इस दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें और मांगें लेकर पहुंचते हैं। कई लोगों के काम भी हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोग मायूस होकर भी लौटते हैं।

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राजनांदगांव में जनता से सीधे संवाद की यह परंपरा नई नहीं है। डॉ. रमन सिंह जब मुख्यमंत्री थे, उस समय भी कुछ समय तक जनता दरबार लगाया गया था। बताया जाता है कि उस दौरान लोगों की भीड़ और मांगें काफी अधिक होने लगी थीं। कई मामलों में समाधान नहीं हो पाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद वह व्यवस्था धीरे-धीरे बंद हो गई थी।

अब राजनांदगांव में एक बार फिर दरबार की राजनीति चर्चा में है। महापौर मधुसूदन यादव के बाद युवा नेता एवं पर्यटन मंडल बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी जनता से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है। नीलू शर्मा सप्ताह में दो दिन, गुरुवार और शुक्रवार को लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

हालांकि इस दरबार में कितने लोग पहुंचेंगे और कितनों की समस्याओं का समाधान होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। लेकिन जनता से सीधे मेल-मुलाकात की इस शुरुआत को राजनीतिक हलकों में अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

महापौर मधुसूदन यादव का दरबार नगर निगम से जुड़ी समस्याओं और आम लोगों की शिकायतों को सुनने के रूप में देखा जाता है। वहीं नीलू शर्मा का दरबार शुरू होना सियासी मायने भी रखता है। वजह यह है कि दो साल बाद विधानसभा चुनाव होना है और राजनांदगांव विधानसभा सीट को लेकर अभी से कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है।

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राजनीतिक गलियारों में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह, महापौर मधुसूदन यादव और अब नीलू शर्मा के नाम को लेकर भी चर्चा होने लगी है। हालांकि अभी चुनाव में समय बाकी है और किसी भी दावेदारी पर आधिकारिक रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन जनता से मेल-मुलाकात और सक्रियता को राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरी ओर विधानसभा अध्यक्ष के दरबार में संतोष अग्रवाल भी बैठते हैं। वे विधायक प्रतिनिधि भी हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनकी सक्रियता को उतनी गंभीरता से नहीं देखा जा रहा है। इसके उलट मधुसूदन यादव और नीलू शर्मा की जनता के बीच सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

फिलहाल राजनांदगांव की राजनीति में सवाल यही है कि जनता के बीच किसकी पकड़ मजबूत होती है और लोगों को संतुष्टि कौन दे पाता है। महापौर मधुसूदन यादव अपने दरबार के जरिए निगम क्षेत्र की समस्याएं सुन रहे हैं, वहीं नीलू शर्मा ने भी जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की शुरुआत कर दी है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जनता दरबार सिर्फ समस्या समाधान तक सीमित रहता है या फिर राजनांदगांव की विधानसभा राजनीति में नई दिशा भी तय करता है।

दरबार में भीड़ से ज्यादा समाधान पर नजर — जनता किसके पास भरोसे से जाती है, यही आगे की राजनीति तय कर सकता है।

जनता को राहत, विकल्प भी बढ़ा

पहले शहर में समस्या लेकर जाने के लिए महापौर मधुसूदन यादव का दरबार ही प्रमुख मंच था। अब नीलू शर्मा के दरबार शुरू होने से लोगों को दूसरा विकल्प भी मिल गया है। इससे जनता के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि उनकी सुनवाई के अवसर अब ज्यादा होंगे।

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