बिहार / झारखण्डराज्‍य

SIR के बाद अब आसान होगा वोटर रजिस्ट्रेशन, सामान्य फॉर्म-6 से ही कर सकेंगे आवेदन

By Admin|30 Sep 2026, 9:21 PM
f X W

रांची
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के आखिरी दिन बुधवार यानी 30 सितंबर 2026 को झारखंड के लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है. निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन मतदाता नामांकन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है. इसके बाद नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. यह बदलाव उन राज्यों में लागू किया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.

Advertisement
Advertisement

अब नहीं देनी होगी माता-पिता की पुरानी जानकारी
SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि वे या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी पहले के किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं. यदि परिवार का कोई सदस्य पुरानी मतदाता सूची में दर्ज था, तो उससे जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने का विकल्प था. फॉर्म-6 से यह हिस्सा हटने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाएगी.

गैर-SIR अवधि में सिर्फ वैधानिक फॉर्म-6
निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लागू रहने वाली आवश्यकता थी. SIR पूरा होने के बाद गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी नए मतदाता अब निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे.

READ ALSO  UP Weather Update: 1 अक्टूबर से मौसम होगा शुष्क, बढ़ेगा तापमान

ईसीआईनेट और CEO पोर्टल से भी हटाया गया विकल्प
SIR पूरी कर चुके राज्यों में ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के अलावा संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है. वहीं जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा ईसीआईनेट पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी. इसका मतलब है कि यह बदलाव सभी राज्यों में एक साथ लागू नहीं हुआ है, बल्कि SIR की स्थिति के आधार पर व्यवस्था अलग रखी गई है.

26 सितंबर की बैठक के बाद आया फैसला
फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सदस्यता वाले पूर्ण निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद आया. बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा SIR के लिए थी. गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा.

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर उठे थे सवाल
फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने का मुद्दा विवाद में रहा था. निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता. निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी.

संधू ने घोषणा को बताया था अनधिकृत
ईसीआईनेट पर ऑनलाइन फॉर्म-6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की थी. हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयानों में कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी गई थी.

READ ALSO  क्षमावाणी आत्मचिंतन, संवाद और अहंकार पर विजय प्राप्त करने का अनुपम पर्व : राज्यमंत्री गौर

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा था कि बिहार में SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिरिक्त घोषणा को बरकरार रखा था. आयोग के मुताबिक, इसलिए इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकता के रूप में लागू किया गया था. अब SIR पूरी कर चुके राज्यों में इसे हटाने के फैसले से सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और SIR प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है.

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी चर्चा
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने की बात भी कही थी.

आयोग ने कहा, SIR के आदेश सर्वसम्मत थे
हालांकि 26 सितंबर के अपने बयान में निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी. ऐसे में फॉर्म-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने का ताजा फैसला आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद लागू व्यवस्था के रूप में सामने आया है. SIR पूरी कर चुके राज्यों में अब मतदाता नामांकन के लिए सामान्य वैधानिक फॉर्म-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा.

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins