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CG : बस्तर ओलंपिक का यह आयोजन केवल खेल नहीं है, बल्कि बस्तर की संस्कृति, उत्साह, और प्रतिभा का उत्सव…

By lokesh sharma|19 Nov 2025, 12:28 PM
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रायपुर/बस्तर । बस्तर ओलंपिक के आयोजन से स्थानीय युवाओं में नए युग का आगाज हुआ, देशभर ने स्थानीय युवाओं की हुनर को देखा, यह सब विष्णुदेव साय की पहल से ही संभव हो पाया है।

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बस्तर के युवाओं में असाधारण प्रतिभा है। खेल जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। विष्णुदेव सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर के हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को एक बेहतर मंच मिले और बस्तर ओलंपिक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

युवाओं में खेल भावना का विकास समाज को मजबूत बनाता है। स्वस्थ तन और स्वच्छ मन के लिए खेल अत्यंत आवश्यक हैं। यहां के खिलाड़ी जिस मेहनत और समर्पण के साथ खेल रहे हैं, वह आने वाले समय में उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा।

बस्तर ओलंपिक ने बस्तर के विकास की यशोगाथा और शांति, सुरक्षा, विकास और नई उम्मीद की नींव डालने का काम किया। बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से साय सरकार बस्तर अंचल के युवाओं की ऊर्जा को खेल के माध्यम से एक सकारात्मक दिशा देने में सफल रहे हैं।

बस्तर ओलंपिक का यह आयोजन केवल खेल नहीं है, बल्कि बस्तर की संस्कृति, उत्साह, और प्रतिभा का उत्सव है। यह आयोजन एक संदेश देता है कि बस्तर का असली चेहरा इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता है, न कि माओवाद की हिंसा।

आज जब लाखों युवा इस ओलंपिक में भाग लेते हैं और अपनी ऊर्जा को खेलों में लगाते हैं, तो यह एक सुखद संकेत है। बस्तर ओलम्पिक का सफल आयोजन लोगों में विश्वास दिलाता है कि बस्तर के युवाओं की क्षमता और उनकी शक्ति को अगर सही दिशा में प्रेरित किया जाए, तो विकास और खुशहाली का रास्ता कोई नही रोक सकता है।

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मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन को लेकर कहा कि इस आयोजन के माध्यम से हमने न केवल बस्तर के युवाओं की छुपी प्रतिभा को देखा, बल्कि उन आत्मसमर्पित भाइयों और बहनों की प्रतिभा को भी देखा, जिन्होंने हिंसा की माओवादी विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की।

नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक अवसर प्रदान करने से होगा और बस्तर ओलंपिक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज आपके चेहरों पर जो मुस्कान है, वह एक खुशहाल और शांतिपूर्ण बस्तर का प्रतीक है।

आगे उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजन भी इन खेलों में हिस्सा ले रहे है। उनकी हिम्मत और जज्बा ने दिखा दिया है कि बस्तर के लोग कभी हार नहीं मानते।

बस्तर ने लम्बे समय से माओवाद के दंश को झेला है। लेकिन आज, बस्तर शांति और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि हर संभव सहयोग के कारण संभव हो पाई है।

बस्तर ओलंपिक में बच्चों-युवाओं ने उत्साह से हिस्सा लिया, और बुजुर्गों ने भी इन खेलों का आनंद लेकर अपने बचपन और स्कूली जीवन की यादें ताजा कीं।

बता दें कि पिछले दिनों बस्तर ओलंपिक में 300 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। इसके साथ ही 18 से अधिक माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर ओलिंपिक की तारीफ की

मन की बात में पीएम मोदी ने कहा था कि जहां नक्सल हिंसा रही, वहां नई क्रांति जन्म ले रही है। PM मोदी ने बस्तर ओलिंपिक में शामिल खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी भी बताई।उन्होंने कहा कि कारी कश्यप की कहानी मुझे बहुत प्रेरित करती है। मोदी ने कहा कि एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है।

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वे कहती हैं कि बस्तर ओलिंपिक ने हमें सिर्फ खेल का मैदान ही नहीं, जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। PM मोदी ने कहा कि, मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि, बस्तर ओलिंपिक का सपना साकार हुआ है। यह उस क्षेत्र में हुआ, जो कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है।

बस्तर ओलिंपिक में 7 जिलों के 1 लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह हमारे युवाओं के संकल्प की गौरव-गाथा है। मोदी ने कहा कि एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, कराटे, कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।

पीएम ने कहा कि, सुकमा के दोरनापाल के पुनेम सन्ना की कहानी तो नए भारत की प्रेरक कथा है। एक समय नक्सली प्रभाव में आए पुनेम आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं।

उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि, सुकमा की पायल कवासी की बात भी कम प्रेरणादायक नहीं है। जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं कि, अनुशासन और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कोडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी को ‘बस्तर यूथ आइकन’ चुना गया है। उनका मानना है कि बस्तर ओलिंपिक दूर-दराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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