छत्तीसगढ़

CG : झीरम पर फिर छिड़ेगी कानूनी जंग, सर्व आदिवासी समाज ने दोबारा जांच की उठाई मांग …

By kadwaghut|19 Sep 2026, 10:43 AM
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जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने हाईकोर्ट में अपील की तैयारी शुरू कर दी है। समाज ने घटना से जुड़ी कथित व्यापक साजिश और अन्य पहलुओं की दोबारा जांच की मांग की है। कानूनी लड़ाई के खर्च के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20-20 रुपये सहयोग जुटाने का फैसला भी बैठक में लिया गया है। झीरम घाटी हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

शुक्रवार को परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों और दोषियों के परिजनों की करीब तीन घंटे बैठक हुई। इसमें एनआईए कोर्ट के फैसले और आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर चर्चा की गई। समाज ने फैसला किया कि अदालत के निर्णय से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात भी कही गई। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के मुताबिक दोषियों के परिजनों ने बैठक में दावा किया कि उनके परिवार के सदस्य घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया। ये परिजनों के दावे हैं; अदालत ने संबंधित 10 लोगों को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुनाया है।

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए घटना के पीछे की कथित व्यापक साजिश से जुड़े सवालों की भी जांच होनी चाहिए। संगठन ने कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर साक्ष्यों के आधार पर कानूनी जांच की मांग की है। बैठक में आत्मसमर्पण कर चुके कुछ नक्सलियों को दिए गए पुनर्वास लाभों का मुद्दा भी उठाया गया। समाज ने मांग की कि झीरम मामले से कथित संबंध रखने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिली आर्थिक सहायता और सरकारी सुविधाओं की पात्रता की पारदर्शी समीक्षा की जाए।

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इधर झीरम मामले को लेकर कांग्रेस भी शनिवार को रायपुर के राजीव भवन में बैठक करने वाली है। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज समेत पार्टी नेताओं, शहीदों के परिजनों, घायलों और विधि विशेषज्ञों के शामिल होने की बात कही गई है। हाल में दीपक बैज ने एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद सार्वजनिक रूप से मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए थे। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मामले की सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

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