CG : दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, कल मनाया जाएगा 'रक्षाबंधन वात्सल्य महा महोत्सव'
रायपुर । मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे ‘समयोपदेश वर्षायोग 2026’ चातुर्मास के अंतर्गत मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, एलक धैर्य सागर एवं एलक स्वागत सागर के पावन सानिध्य में नियमित धार्मिक अनुष्ठान, स्वाध्याय व धर्म सभा का आयोजन किया जा रहा है। राजधानी रायपुर की धरा पर पहली बार शुक्रवार, 28 अगस्त को प्रातः 7 बजे से मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में ‘रक्षाबंधन वात्सल्य महा महोत्सव’ का भव्य आयोजन मुनि श्रीससंघ के पावन सानिध्य में किया जा रहा है।
वर्षायोग समिति के कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ,उपाध्यक्ष श्रद्धेय जैन विक्की मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि आज प्रातः काल की प्रथम श्रृंखला में मूलनायक भगवान का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई मूलनायक भगवान को अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य त्रिकाल चौबीसी में भगवान स्थापित करने वाले डी.डी. नगर निवासी अमरचंद जैन, सोहनी देवी जैन, यशवंत जैन, जय जैन, किशोर जैन, वनिता जैन, महेंद्र जैन, मेधा जैन, प्रथम जैन, गौरव जैन एवं आलोक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। तदोपरांत मूलनायक भगवान के समक्ष शांतिधारा करने का मुख्य सौभाग्य निर्भ, अवीश, सुभाष, निमिषा जैन तथा परतापुर निवासी मनीष चंदा को प्राप्त हुआ।
प्रातःकालीन धार्मिक कक्षाओं के अंतर्गत मुनि पुनीत सागर ने जैन दर्शन के महान ग्रंथ ‘तत्त्वार्थ सूत्र’ का गहन अध्ययन कराया। वहीं मुनि आगम सागर ने ‘छह ढाला’ ग्रंथ का वाचन कर श्रावकों को धर्म के मूलाधार एवं सम्यक दर्शन से परिचित कराया।
दिगम्बर मुनि की कठिन साधना एवं नवधा भक्तिपूर्वक आहारदान की अपनी महिमा है। चातुर्मास की कठिन साधना के अंतर्गत आज मुनि आगम सागर एवं मुनि पुनीत सागर का आज व्रत रहा। ससंघ के अन्य मुनि का श्रद्धालुओं द्वारा नवधा भक्ति के साथ पडगाहन कर आहारदान कराया गया। इसमें एलक धैर्य सागर को आहार देने का सौभाग्य मंदिर कार्यालय के सामने निवासी ऊषा धरमचंद गंगवाल परिवार को तथा एलक स्वागत सागर को आहारदान कराने का सौभाग्य जैन बाड़ा निवासी सरिता सुनील जैन एवं रेखा रमेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
मुनि आगम सागर की मंगल देशना
आज’छह ढाला’ के स्वाध्याय के उपरांत आयोजित मुख्य धर्म सभा में मुनि आगम सागर ने अपने प्रवचन में कहा कि अज्ञानता, मिथ्या चारित्र और सांसारिक विषयों में लीन होने के कारण जीव आत्मा और शरीर को एक ही मान बैठता है। जब तक अंतरंग में राग, द्वेष और परिग्रह का भाव रहेगा, तब तक जीव संसार चक्र में भटकता रहेगा।
मुनि ने स्पष्ट किया कि जैन दर्शन के अनुसार संसार के प्रत्येक जीव में सम्यक दर्शन के माध्यम से भगवान बनने की अनंत क्षमता है। भव्य और अभव्य जीवों की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि अभव्य जीव अपने अनादि स्वभाव के कारण कभी सुधरते नहीं हैं। उन्होंने भरत चक्रवर्ती के पुत्र मरीचि का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने दिगंबर मुद्रा में रहकर भी 363 विपरीत मत चलाए थे, जो दर्शन मोहनीय कर्म के तीव्र उदय का परिणाम था। मुनि ने श्रावकों से देव, शास्त्र और गुरु पर अंतरंग से दृढ़ आस्था रखने का आह्वान किया।
28 अगस्त को ‘रक्षाबंधन वात्सल्य महा महोत्सव’
राजधानी रायपुर की धरा पर पहली बार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को प्रातः 7:00 बजे से मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में ‘रक्षाबंधन वात्सल्य महा महोत्सव’ का भव्य आयोजन मुनि ससंघ के पावन सानिध्य में किया जा रहा है।
महा महोत्सव की प्रमुख रूप से प्रातः 7:00 बजे प्रथम 4 इंद्रों द्वारा बोलियों के माध्यम से जी का अभिषेक एवं शांतिधारा की जाएगी। मूलनायक भगवान, देव-शास्त्र-गुरु एवं आचार्यश्री का विशेष पूजन अर्घ्य समर्पित किया जायेगा। श्रेयांश नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पूजन, निर्वाण कांड वाचन एवं बोलियों द्वारा निर्वाण लाडू समर्पित किया जाएगा। तथा सभी प्रमुख पात्रों तथा इंद्र-इन्द्राणियों द्वारा कुल 100 की संख्या में नृत्य भक्ति के साथ 700 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।
साथ ही मुनि ससंघ के मुखारविंद से मंत्रोच्चार द्वारा अभिमंत्रित रक्षा सूत्र (ब्रेसलेट) समाज के सभी सदस्यों को प्रदान किया जाएगा। सकल दिगंबर जैन समाज, समयोपदेश वर्षायोग समिति एवं बड़ा मंदिर समिति ने जानकारी दी है कि विधान में बैठने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधु अपने घरों से द्रव्य, बादाम एवं कम से कम 13 श्रीफल अवश्य लेकर आएं। साथ ही सौधर्म इंद्र, ईशान इंद्र, चक्रवर्ती सहित सभी पात्र एवं इंद्र-इन्द्राणियाँ अपनी निर्धारित पारंपरिक वेशभूषा धोती-दुपट्टा, मुकुट-माला में उपस्थित रहें। आयोजकों ने समस्त जैन समाज से सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य अर्जन करने की अपील की है।
