महापौर मधुसूदन यादव
राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ की राजनीति में राजनांदगांव का अपना अलग महत्व है। इस शहर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मधुसूदन यादव ने पार्षद से लेकर महापौर और सांसद तक का सफर तय किया है। कभी साइकिल से घर-घर दूध पहुंचाने वाले मधुसूदन यादव आज राजनांदगांव नगर निगम के महापौर हैं। उनके राजनीतिक जीवन में संघर्ष, संगठन से जुड़ाव और लगातार चुनावी सक्रियता की लंबी कहानी है।

22 अगस्त 1970 को राजनांदगांव में जन्मे मधुसूदन यादव 23 अगस्त 2026 को अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जन्मदिन के अवसर पर शहर में विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता जन्मदिन को सेवा कार्यों के साथ मनाने की तैयारी में हैं।
साधारण परिवार में हुआ जन्म
मधुसूदन यादव का जन्म राजनांदगांव में एक साधारण परिवार में हुआ। उपलब्ध प्रकाशित जीवनी के अनुसार उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद यादव और माता का नाम थगिया देवी है। उनका परिवार गौ पालन और दूध बेचने के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था।
मधुसूदन यादव ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की। परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें शुरुआती जीवन में परिवार के काम में हाथ बंटाना पड़ा। बताया जाता है कि वे साइकिल से घर-घर दूध पहुंचाने का काम भी करते थे। यही सामान्य और संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की नींव बनी।
उनका जीवन इस मायने में भी खास माना जाता है कि उन्होंने राजनीति में किसी बड़े राजनीतिक परिवार की विरासत के सहारे प्रवेश नहीं किया, बल्कि स्थानीय स्तर से अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।
1995 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मधुसूदन यादव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय राजनीति से हुई। 1995 में वे पहली बार पार्षद चुने गए। इसके बाद वे लगातार तीन बार राजनांदगांव नगर निगम के पार्षद रहे। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने संगठन और शहर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की।
राजनांदगांव की राजनीति में उनका नाम धीरे-धीरे भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय नेताओं में शामिल होने लगा। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री और राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है।
स्थानीय राजनीति में लगातार सक्रियता के बाद उन्हें नगर निगम की बड़ी जिम्मेदारी मिली।

पहली बार बने राजनांदगांव के महापौर
2004 में मधुसूदन यादव पहली बार राजनांदगांव नगर निगम के महापौर बने। उस समय उन्होंने करीब एक वर्ष तक महापौर के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2005 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में वे दोबारा भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और महापौर बने।
महापौर के रूप में उनके शुरुआती कार्यकाल ने उन्हें शहर की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बना दिया। नगर निगम की राजनीति से निकलकर उन्होंने आगे विधानसभा और लोकसभा की राजनीति में भी अपनी जगह बनाई।
2009 में बने राजनांदगांव के सांसद
मधुसूदन यादव के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा पड़ाव 2009 का लोकसभा चुनाव रहा। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राजनांदगांव लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।
इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवव्रत सिंह से हुआ। मधुसूदन यादव ने यह चुनाव बड़ी जीत के साथ जीता और 15वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने देवव्रत सिंह को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था।
सांसद बनने के बाद उनकी राजनीतिक पहचान केवल राजनांदगांव शहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे लोकसभा क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव बढ़ा।
2015 में फिर संभाली महापौर की जिम्मेदारी
लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मधुसूदन यादव ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति की ओर रुख किया। 2015 में भाजपा ने उन्हें राजनांदगांव नगर निगम महापौर पद का उम्मीदवार बनाया।
उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराकर दोबारा महापौर पद हासिल किया। इस तरह वे राजनांदगांव नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर प्रमुख भूमिका में आ गए। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 2015 में महापौर का पद संभाला और जनवरी 2020 तक इस पद पर रहे।
2018 में विधानसभा चुनाव भी लड़ा
मधुसूदन यादव ने विधानसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई। 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में उन्होंने डोंगरगांव विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के दलेश्वर साहू से हार का सामना करना पड़ा।
चुनावी राजनीति में हार के बावजूद उनका संगठनात्मक सक्रियता से जुड़ाव जारी रहा। भाजपा में उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं।
2025 में तीसरी बार महापौर बनने का मौका
राजनांदगांव नगर निगम के 2025 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर मधुसूदन यादव पर भरोसा जताया। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के निखिल द्विवेदी से हुआ।
11 फरवरी 2025 को नगरीय निकाय चुनाव के लिए मतदान हुआ और 15 फरवरी को परिणाम घोषित किए गए। राजनांदगांव नगर निगम में मधुसूदन यादव ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने 62,517 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी निखिल द्विवेदी को 21,379 वोट मिले।
छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने सभी 10 नगर निगमों के महापौर पद जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। राजनांदगांव में भी भाजपा ने मधुसूदन यादव के नेतृत्व में महापौर पद पर कब्जा किया।
इस जीत के साथ मधुसूदन यादव ने राजनांदगांव नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर अपनी मजबूत वापसी की।
शहर के विकास को लेकर सक्रियता
महापौर बनने के बाद मधुसूदन यादव ने शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रियता दिखाई है। पेयजल, सड़क, सफाई, प्रकाश व्यवस्था, अधोसंरचना और शहर के सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दे नगर निगम की प्राथमिकताओं में रहे हैं।
2025 में उनके बजट और विकास योजनाओं को लेकर शहर में कई चर्चाएं हुईं। इनमें एक और गौरव पथ विकसित करने की योजना भी शामिल रही। स्थानीय भाजपा नेताओं ने शहर में पहले बने गौरव पथ की परिकल्पना का श्रेय भी मधुसूदन यादव को दिया है।
वहीं 2026 में भी वे शहर और जिले की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आए हैं। मई 2026 में वे भाजपा के चुनाव संयोजक के रूप में घुमका क्षेत्र में पार्टी के लिए जनसंपर्क और बैठकों में सक्रिय रहे।
संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका
मधुसूदन यादव की पहचान केवल चुनाव लड़ने वाले नेता के रूप में नहीं बल्कि भाजपा संगठन में सक्रिय नेता के रूप में भी रही है। वे अलग-अलग समय पर पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।
2024 में उन्हें मुंगेली जिले के भाजपा संगठन चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी संगठन में भी उनके अनुभव का उपयोग लगातार किया जाता रहा है।
साधारण जीवन से राजनीति के शिखर तक
मधुसूदन यादव के जीवन की सबसे उल्लेखनीय बात उनका साधारण पारिवारिक और सामाजिक परिवेश से निकलकर राजनीति के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचना है।
दूध बेचने वाले परिवार में जन्म, परिवार के काम में सहयोग, साइकिल से घर-घर दूध पहुंचाने से लेकर पार्षद बनने तक का सफर उनके संघर्षपूर्ण शुरुआती जीवन को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने महापौर, सांसद और फिर दोबारा महापौर बनने तक का सफर तय किया।
उनके राजनीतिक जीवन में पार्षद, महापौर, सांसद और फिर महापौर जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव आए। 2009 में लोकसभा पहुंचने के बाद 2015 में उन्होंने फिर नगर निगम की राजनीति में वापसी की और 2025 में एक बार फिर राजनांदगांव के महापौर निर्वाचित हुए।
जन्मदिन पर सेवा कार्यों की तैयारी
मधुसूदन यादव के जन्मदिन के अवसर पर 23 अगस्त 2026 को राजनांदगांव शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जन्मदिन के कार्यक्रमों को वृद्धजनों और दिव्यांगों की सेवा से जोड़ने की तैयारी की गई है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में शाम के समय जन्मोत्सव कार्यक्रम भी रखे गए हैं।
ऐसे में मधुसूदन यादव का यह जन्मदिन उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा को याद करने का भी अवसर है।
राजनांदगांव के महापौर मधुसूदन यादव की राजनीतिक यात्रा कई उतार-चढ़ाव से होकर गुजरी है। एक सामान्य परिवार से निकलकर स्थानीय राजनीति में कदम रखने वाले यादव ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में पार्षद से लेकर महापौर और सांसद तक की जिम्मेदारी संभाली।
2004 में पहली बार महापौर बनने के बाद 2009 में लोकसभा सांसद बनना, 2015 में दोबारा महापौर बनना और फिर 2025 में बड़ी जीत के साथ तीसरी बार राजनांदगांव नगर निगम की महापौर की जिम्मेदारी संभालना उनके राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव हैं।
23 अगस्त 2026 को उनके 56वें जन्मदिन पर राजनांदगांव के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। संघर्ष से शुरुआत कर शहर की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले मधुसूदन यादव का सफर राजनांदगांव की स्थानीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण कहानी भी है।
