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डोंगरगांव , चातुर्मास के दौरान धर्मप्रभावना और सांस्कृतिक आयोजन की कड़ी में मंगलवार की रात माणक भवन में नेम-राजुल की अमर प्रेम की गौरव गाथा का नाट्य रूप में मंचन किया गया। रात 8 बजे शुरू हुआ यह कार्यक्रम करीब दो घंटे चला। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष व बच्चे कार्यक्रम देखने पहुंचे। नाट्य प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को जीवंतता से निभाया कि पूरा मंचन भावनाओं से भर उठा। विशेष रूप से नेम, राजुल और सत्यभामा की भूमिकाओं ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
संवाद, अभिनय के बेहतर तालमेल ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा। नाट्य मंचन में नेम की भूमिका योगिता लोढ़ा तथा राजुल की भूमिका सुचि लोढ़ा ने निभाई। नेम के पिता की भूमिका श्रद्धा बोहरा और माता की भूमिका नीरू डागा ने निभाई।
राजुल के पिता की भूमिका सुनीता नखत तथा माता की भूमिका सुमन जैन ने निभाई। कृष्ण की भूमिका नैना लोढ़ा और सत्यभामा की भूमिका काम्या नखत ने निभाई। राजुल की सखियों की भूमिका सरिता गोलछा, मेघा नाहटा ने निभाई। नेम की भाभियों के किरदार में निर्मला नखत, मोना चोपड़ा एवं तोषी गोलछा नजर आईं। पड़ोसियों की भूमिका प्रेरणा बोहरा एवं रूपाली चोपड़ा ने निभाई। संचालन की जिम्मेदारी दीपमाला माहेश्वरी व सैजल सांखला ने संभाली। दूत-सेवक की भूमिका संस्कार लोढ़ा व जिनेश लोढ़ा तथा सारथी की भूमिका दिव्यांश चोपड़ा ने निभाई।
भगवान नेमिनाथ के जीवन प्रसंग को जाना महिला मंडल ने नाट्य मंचन को प्रभावी बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। मंच सज्जा, पात्रों की वेशभूषा, संवाद अदायगी और भावपूर्ण अभिनय में सामूहिक मेहनत नजर आई। नेम-राजुल की अमर प्रेम गाथा के माध्यम से जहां दर्शकों को भगवान नेमिनाथ और राजुल के जीवन प्रसंग से परिचित होने का अवसर मिला, वहीं कथा ने सांसारिक मोह से ऊपर उठकर त्याग, वैराग्य और आत्मकल्याण की ओर बढ़ने का संदेश भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। समाज के लोग मौजूद रहे।
