बोले—घर पर आसानी से बनाएं, महिला समूहों के लिए भी बन सकता है स्वरोजगार का माध्यम
राजनांदगांव। बाजार में मिलावटी एवं कथित रूप से केमिकल से तैयार पनीर की बिक्री को लेकर किसान नेता अशोक चौधरी ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, इसके बावजूद अधिक मुनाफे के लालच में कुछ कारोबारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने लोगों को घर पर दूध का पनीर अथवा सोया पनीर तैयार कर उपयोग करने की सलाह दी है।
अशोक चौधरी ने बताया कि सोया पनीर घर में बेहद आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए लगभग 250 ग्राम या आधा किलो सोयाबीन को अच्छी तरह साफ कर रातभर पानी में भिगोकर रखा जाए। सुबह भीगे हुए सोयाबीन को मिक्सर में बारीक पीसकर साफ कपड़े से छान लिया जाए। इससे तैयार सोया दूध को उबालने के बाद नींबू या पनीर जमाने वाले पदार्थ की मदद से फाड़कर सामान्य दूध के पनीर की तरह सोया पनीर तैयार किया जा सकता है।
चौधरी के अनुसार, एक किलो सोयाबीन से करीब 8 लीटर तक सोया दूध तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 250 ग्राम सोयाबीन से घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त मात्रा में सोया दूध और पनीर बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक घर पर तैयार सोया पनीर कम लागत वाला विकल्प है और इससे बाजार में मिलने वाले संदिग्ध या मिलावटी पनीर से बचा जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि करीब एक किलो सोया पनीर तैयार करने में 50 से 60 रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि बाजार में दूध से बना पनीर लगभग 440 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। उन्होंने सोया पनीर को पौष्टिक और किफायती बताते हुए लोगों से इसे भोजन में शामिल करने की अपील की।
किसान नेता अशोक चौधरी ने कहा कि कुछ समय पहले राजनांदगांव में भी पनीर निर्माण एवं बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों पर खाद्य विभाग की कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। इसे देखते हुए जहां संभव हो, परिवारों को घर पर ही पनीर तैयार करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी अवसर
अशोक चौधरी ने सुझाव दिया कि राजनांदगांव सहित प्रदेश में कार्यरत महिला स्व-सहायता समूह सोया पनीर निर्माण को स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। समूह स्थानीय स्तर पर स्वच्छ एवं ताजा सोया पनीर तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि गांवों और शहरी क्षेत्रों के महिला समूह यदि निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सोया पनीर तैयार करें, तो स्कूलों के मध्याह्न भोजन सहित अन्य पोषण कार्यक्रमों में भी इसकी उपयोगिता की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। इससे बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय महिला समूहों को रोजगार का अवसर भी मिल सकता है।
चौधरी ने लोगों से अपील की कि खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें तथा संदिग्ध पनीर या अन्य खाद्य सामग्री की सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को दें।
