राजनांदगांव , सपने बड़े हों तो साधनों की कमी रास्ता नहीं रोकती। चिखली स्कूल मैदान में हॉकी स्टिक थामकर रोज पसीना बहाने वाले 12 वर्षीय नमन यादव ने यह साबित कर दिखाया है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के गोपालपुर गांव के नमन का चयन इंडियन आर्मी की आर्मी बॉयज कंपनी बेंगलुरु के लिए हुआ है। चयन ट्रायल में देशभर के सैकड़ों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, लेकिन इनमें सिर्फ 11 खिलाड़ियों का चयन हुआ। इनमें नमन छत्तीसगढ़ का एकमात्र चयनित खिलाड़ी है।
नमन की कामयाबी के पीछे सिर्फ उसकी मेहनत नहीं, बल्कि परिवार का संघर्ष भी है। पिता अशोक यादव हैदराबाद में मिस्त्री का काम करते हैं और मां संतोषी यादव श्रमिक का काम करती हैं। रोजी-रोटी के लिए दोनों को घर से दूर हैदराबाद में रहना पड़ता है। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई और खेल को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
माता-पिता बाहर रहकर परिवार के लिए कमाते रहे और नमन नाना-नानी के घर रहकर अपने सपने को आकार देता रहा। नमन चिखली स्कूल के सामने अपने नाना-नानी के घर रहकर पढ़ाई करता है और सुबह-शाम मैदान में हॉकी की तैयारी करता है। नाना मजदूरी करते हैं और नानी बर्तन मांजती हैं। तीन भाइयों में सबसे बड़े नमन के लिए नाना-नानी का घर सहारा बना तो चिखली का मैदान उसकी हॉकी की दुनिया। अब इसी मैदान से निकला उसका सपना आर्मी बॉयज कंपनी तक पहुंच गया है।
8 महीने की ट्रेनिंग, 3 साल से तैयार हो रहा माहौल रुद्राक्षम वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से चिखली स्कूल मैदान में चल रहे नि:शुल्क हॉकी प्रशिक्षण शिविर से नमन करीब आठ महीने पहले जुड़ा था। हालांकि यहां पिछले तीन साल से बच्चों को हॉकी की ट्रेनिंग दी जा रही है। वर्तमान में सुबह-शाम 200 से ज्यादा खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी, गोल्ड मेडलिस्ट और एनआईएस कोच मृणाल चौबे बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं। उनका कहना है कि हॉकी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि बच्चों को जीवन की सही दिशा देने का माध्यम है। प्रशिक्षण के दौरान खेल के साथ शिक्षा, अनुशासन, स्वास्थ्य और नशे से दूरी पर भी जोर दिया जाता है।
कोच ने स्टिक से लेकर आर्थिक मदद तक की नमन के चयन में उसके खेल के साथ कोच मृणाल चौबे की मेहनत भी अहम रही। सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों को खेल सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर जरूरत के समय आर्थिक सहयोग तक कोच की ओर से किया जाता है। नमन के लिए हॉकी स्टिक, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था में भी उन्होंने मदद की। जिला हॉकी संघ एवं छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी ने नमन के चयन को बड़ी उपलब्धि बताया। चिखली मैदान से प्रशिक्षण लेकर बच्चे देश की प्रतिष्ठित हॉकी अकादमियों तक पहुंच रहे हैं। इसे राजनांदगांव की हॉकी नर्सरी के लिए गौरव माना जा रहा है।
