CG : पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित…
बेमेतरा । रेवेन्द्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, ढोलिया-बेमेतरा में अधिष्ठाता डॉ. अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा “पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में “सुरक्षित पर्यावरण एवं सुरक्षित भविष्य” विषय पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, आत्मानुशासन एवं सकारात्मक जीवनशैली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी, बेमेतरा से उपस्थित शशि दीदी एवं पियूष भाई ने छात्र-छात्राओं से परिचर्चा करते हुए पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने प्रदूषण को कम करने, अधिक से अधिक पौधरोपण करने, प्राकृतिक एवं उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को मन की एकाग्रता, स्वयं की पहचान, क्रोध पर नियंत्रण, प्रसन्नचित्त रहने, समय प्रबंधन तथा आत्मिक शक्ति को मजबूत बनाए रखने के उपाय भी बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल बाहरी प्रकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक एवं आंतरिक वातावरण को सकारात्मक रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं को लगभग 5 मिनट का ध्यान अभ्यास कराया गया। साथ ही विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग को कम करने तथा अध्ययन, स्वास्थ्य एवं रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय का सदुपयोग करने की सलाह दी गई।
इस अवसर पर डॉ. इजी यू. के. ध्रुव प्रभारी अधिष्ठाता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण डॉ. टी. डी. साहू, डॉ. असित कुमार, कुंती बंजारे, डॉ. भारती बघेल, डॉ. हेमलता निराला, राजेश्वरी कुर्रे, डॉ. साक्षी बजाज, प्रतिभा सिंह, डॉ. सरिता शर्मा, डॉ. महानंद, डॉ. रामेश्वर एवं संजीव गुर्जर सहित महाविद्यालय के समस्त कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ उन्हें आपदा एवं विपरीत परिस्थितियों के प्रति जागरूक करना तथा स्वस्थ, सकारात्मक एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
