खुले दरवाजे और बिना सुरक्षा इंतजाम के बच्चों को स्कूल पहुंचाने की शिकायतें, यातायात विभाग ने चालकों को दी समझाइश
राजनांदगांव। शहर में स्कूली बच्चों के परिवहन के दौरान ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा बरती जा रही कथित लापरवाही बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। कई स्थानों पर क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल लाने-ले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ वाहनों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण सफर के दौरान बच्चों के हाथ-पैर बाहर दिखाई देने की स्थिति भी बन रही है।
स्कूली बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए वाहनों के संचालन को लेकर निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। इसके बावजूद शहर में चल रहे कुछ ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने तथा क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में अचानक ब्रेक लगने, वाहन के अनियंत्रित होने अथवा सड़क दुर्घटना की स्थिति में गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है।

बताया जा रहा है कि स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों के लिए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश निर्धारित हैं। वाहन में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही निर्धारित क्षमता का पालन और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर जैसी आवश्यक जानकारी प्रदर्शित करने पर भी जोर दिया जाता है।
इस संबंध में यातायात प्रभारी नवरतन कश्यप ने बताया कि स्कूली बसों की लगातार जांच की जा रही है। इसके साथ ही रिक्शा और ऑटो चालकों को स्कूलों में जाकर समझाइश भी दी जा रही है। चालकों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बच्चों को घर से स्कूल और वापस घर तक पूरी सुरक्षा के साथ पहुंचाया जाए तथा वाहन में बैठने के दौरान किसी भी बच्चे का हाथ, पैर या शरीर का अन्य हिस्सा वाहन से बाहर नहीं होना चाहिए।
अब सवाल यह है कि केवल समझाइश के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की नियमित जांच और निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से होती है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण अभिभावकों की भी मांग है कि स्कूल समय में ऑटो और ई-रिक्शा की नियमित जांच कर नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
