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​CG : राजस्व सुधारों की नई इबारत लिखता छत्तीसगढ़: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

By lokesh sharma|08 Jul 2026, 4:38 PM
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  • विष्णु प्रसाद वर्मा

          सहायक संचालक

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​99.95 प्रतिशत ऑटो म्यूटेशन सफलता दर ने रचा रिकॉर्ड, ऑटो डायवर्सन में 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का हुआ निराकरण

​कोरिया बना नंबर-1, धमतरी ने टॉप-5 में दर्ज कराई दमदार मौजूदगी; जिलों के प्रदर्शन ने दिखाई जवाबदेह प्रशासन की तस्वीर

​NGDRS इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा और रिकवरी मॉड्यूल से राजस्व सेवाओं को मिलेगा नया डिजिटल ढांचा

​आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर से राहत, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण के साथ सुशासन का मजबूत मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़

​रायपुर, सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।

     ​पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही, भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

​आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा

       ​राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।

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      ​वहीं दूसरी ओर, ‘ऑटो डायवर्सन’ व्यवस्था के तहत कुल 5 हजार 661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4 हज़ार 739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं; अतः इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।

​ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर

     ​किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुराने दौर में पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिसने भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दिया।

      ​आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीनी धोखाधड़ी पर लगाम लगी है।

     ​इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।

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​ऑटो डायवर्सन से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया हुई तेज

     ​कृषि भूमि को आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में बदलना (डायवर्सन) शहरीकरण, निवेश और रोजगार सृजन की रीढ़ है। पहले आवेदकों को शुल्क, आवश्यक दस्तावेजों और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।

      ​फरवरी से जून 2026 के बीच 5 हजार 661 आवेदनों में से 4 हजार 739 का त्वरित निस्तारण यह दिखाता है कि विभाग ने गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण जैसी पेचीदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर दिया है। वर्तमान में जो 922 लंबित मामले हैं, उनके पीछे अपूर्ण दस्तावेज, चालान राशि में तकनीकी अंतर या नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) के मास्टर प्लान से भिन्न प्रयोजन होना जैसे व्यावहारिक कारण हैं। इन चुनौतियों को सार्वजनिक करना विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

​जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति

     ​ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जो यह प्रमाणित करती है कि सुधार जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं। कोरिया जिला कुल 59 प्रकरणों में से सभी 59 का शत-प्रतिशत निराकरण कर 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर रहा।कोरबा जिला 98.46 प्रतिशत की सफलता दर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी तरह ​मुंगेली जिला 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।​बालोद जिला 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहा।​धमतरी जिला कुल 165 प्रकरणों में से 153 का वैधानिक निराकरण कर 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पाँचवाँ (शीर्ष-5) स्थान प्राप्त किया। धमतरी का यह प्रदर्शन नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली का परिणाम है।

​तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स

      ​विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक एकीकृत ‘डिजिटल इकोसिस्टम’ के निर्माण में जुटा है। ​NGDRS API Integration इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।

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​’Diverted to Diverted’ मॉड्यूल:

      यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत निस्तारण के लिए 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।

​’मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल

      एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 रखा गया है।

​’रिकवरी’ मॉड्यूल
 
    पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित किया गया है।

​सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़

     ​यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएँ मिल रही हैं।

     ​दिसंबर 2026 तक के लिए तय किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी  से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस बेजोड़ संगम से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित शासन की एक नई मिसाल पेश की है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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