बिहार / झारखण्डराज्‍य

केंद्रीय टीम के सर्वे में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं उजागर

By Admin|30 May 2026, 7:03 PM
f X W

रांची

Advertisement
Advertisement

 मत्स्य शिकार (मछली पकड़ने) की आधुनिक और सही तकनीक से राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा। यहां मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इससे जुड़े लोगों तथा मछुआरों को मछली पकड़ने की सही तकनीक का प्रशिक्षण मिले

इस उद्देश्य से राज्य में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति, मछुआरों द्वारा उपयोग की जा रही पारंपरिक मछली पकड़ने की तकनीक तथा भविष्य में उन्नत मत्स्य प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं के आकलन के लिए राज्य के जलाशयों में तीन दिनों तक क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया। यह सर्वेक्षण केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के वैज्ञानिक डॉ. श्रवण कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीम ने किया।

सर्वेक्षण के लिए गेतलसूद, तेनुघाट, कांके, हटिया, मैथन एवं पंचेत जलाशयों का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान जलाशयों में उपलब्ध मत्स्य संसाधनों, मछली पकड़ने की वर्तमान पद्धति, उपयोग किए जा रहे मत्स्य जालों, नावों, मत्स्य शिकार की चुनौतियों तथा स्थानीय मछुआरों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं का अध्ययन किया गया।

विभिन्न स्थलों पर मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों तथा स्थानीय हितधारकों से चर्चा कर जलाशय आधारित मात्स्यिकी की व्यावहारिक समस्याओं और संभावित तकनीकी समाधानों की जानकारी प्राप्त की गई।

सर्वेक्षण में यह पाया गया कि झारखंड के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उन्नत एवं वैज्ञानिक मत्स्य शिकार तकनीक, उपयुक्त मत्स्य जालों, सुरक्षित एवं ऊर्जा दक्ष नावों तथा आधुनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

जलाशयों की भौगोलिक स्थिति, जल की गहराई और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुरूप मत्स्य शिकार तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता महसूस की गई। इस सर्वेक्षण के आधार पर मछुआरों के लिए उन्नत एवं आधुनिक मत्स्य प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना बनाई जाएगी।

READ ALSO  पटना पर बाढ़ का बड़ा खतरा! गंगा रिकॉर्ड स्तर की ओर, निचले इलाकों में घुसा पानी

प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीके से मछली पकड़ने की तकनीक, बेहतर एवं चयनात्मक मत्स्य जालों के उपयोग, जलाशय मात्स्यिकी के लिए उपयुक्त नावों का संचालन तथा पर्यावरण अनुकूल विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों की जानकारी, मछली पकड़ने के दौरान सुरक्षा उपाय तथा मत्स्य संसाधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा

भविष्य में झारखंड के चयनित जलाशयों में उन्नत मत्स्य जालों, आधुनिक मत्स्य शिकार तकनीकों तथा विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने का प्रस्ताव है।

वैज्ञानिक तरीकों से मत्स्य उत्पादन मछुआरों की समृद्धि में सहायक : निदेशक
मस्त्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि झारखंड के जलाशयों में वैज्ञानिक तरीकों, उपयुक्त प्रशिक्षण और उन्नत मत्स्य उपकरणों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं मछुआरों की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा बेहतर मत्स्य प्रौद्योगिकी के प्रसार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाएगा।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins