उत्तर प्रदेशराज्‍य

RO-ARO भर्ती में OBC प्रतिनिधित्व 42%, आयोग कोर्ट में करेगा समर्थन पेश

By Admin|09 May 2026, 6:31 PM
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RO-ARO भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को मिला 42% प्रतिनिधित्व, आयोग कोर्ट में रखेगा मजबूत पक्ष

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– 419 अभ्यर्थियों का हुआ था चयन, 176 ओबीसी वर्ग से चयनित

– हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन से जुड़े समान मामले के आधार पर कोर्ट में पक्ष रखेगा यूपी लोक सेवा आयोग

– चयनित अभ्यर्थियों को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अध्ययन शुरू

– रिजल्ट के बाद एक दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थी कर चुके हैं ज्वाइन

– त्रिस्तरीय प्रक्रिया के तहत हुई थी RO-ARO भर्ती परीक्षा

– आयोग का दावा- आरक्षण नियमों के तहत हुई पूरी चयन प्रक्रिया

– कोर्ट में भर्ती प्रक्रिया के समर्थन में मजबूती से रखा जाएगा पक्ष

– RO-ARO भर्ती में सामाजिक न्याय और मेरिट दोनों का संतुलन

– ओबीसी युवाओं की बढ़ी भागीदारी बनी चर्चा का केंद्र

प्रयागराज/लखनऊ
समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा-2023 में चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अब हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन से जुड़े समान मामले और उस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का गहन अध्ययन कर रहा है। आयोग का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा केवल 'सूटेबिलिटी एग्जाम' होती है, जिसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ते, जबकि आरक्षण का अंतिम निर्धारण फाइनल चयन चरण में किया जाता है। आयोग के सचिव गिरिजेश त्यागी ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अंतरिम रोक दे चुका है और आयोग हाईकोर्ट में इन्हीं स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा।

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419 चयनितों में 176 ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन
आयोग द्वारा बताया गया कि 5 अप्रैल 2026 को घोषित अंतिम परिणाम में कुल 419 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें 176 अभ्यर्थीओबीसी वर्ग से हैं। यानी कुल चयन में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य वर्ग का प्रतिशत 28.16 रहा। आयोग का कहना है कि यह परिणाम पूरी तरह समावेशी चयन प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें मेरिट और नियमबद्ध आरक्षण व्यवस्था दोनों का संतुलन सुनिश्चित किया गया।

नियमों और विज्ञापन के अनुरूप हुई पूरी प्रक्रिया
आयोग सचिव गिरिजेश त्यागी ने कहा कि RO-ARO भर्ती प्रक्रिया में आयोग ने विज्ञापन की शर्तों और 1994 तथा 1986 की स्थापित नियमावलियों का पूरी तरह पालन किया है। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय परीक्षा प्रणाली में प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग और उपयुक्तता तय करने के लिए होती है, जबकि अंतिम चयन मुख्य परीक्षा, टंकण परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है। ऐसे में फाइनल रिजल्ट में ओबीसी वर्ग को मिला 42 प्रतिशत प्रतिनिधित्व यह साबित करता है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सामाजिक न्याय के अनुरूप रही है।

हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे हैं सवाल
कुछ अभ्यर्थियों द्वारा अंतिम चयन सूची को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाओं में आरक्षण और माइग्रेशन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि आयोग का कहना है कि अदालत में पूरी प्रक्रिया का कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष विस्तार से रखा जाएगा।

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हरियाणा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर फोकस
आयोग अब हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेशों और कानूनी टिप्पणियों को अपने पक्ष के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है। आयोग का मानना है कि आरक्षण और माइग्रेशन से जुड़े मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट संकेत दे चुका है कि प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर आरक्षण लागू करने के प्रश्न पर विस्तृत कानूनी परीक्षण आवश्यक है। इसी आधार पर आयोग हाईकोर्ट में यह पक्ष रखेगा कि पूरी चयन प्रक्रिया नियमबद्ध, पारदर्शी और स्थापित संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप की गई है, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी या नुकसान न हो।

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