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भोपाल में आज होगा ऐतिहासिक उद्घाटन: भारत का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क

By Admin|09 May 2026, 11:01 AM
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भोपाल

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी।

इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है।

इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी।

इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग।

इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

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इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी।

अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे।

भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण?

भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए।

'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा।
3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:

    प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।
    प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।
    मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

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