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जिला प्रशासन के प्रयासों से बिठूर की पारंपरिक माटीकला को मिल रही नई पहचान

By Admin|19 May 2026, 10:36 PM
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लखनऊ/कानपुर

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति और बचत जैसे सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है। इसी क्रम में कानपुर के बिठूर की पारंपरिक माटीकला को नया स्वरूप देने की पहल शुरू हुई है, जहां अब मिट्टी की गुल्लकें आधुनिक डिजाइन और आकर्षक रंगों के साथ तैयार की जा रही हैं। इस अभियान में जिला प्रशासन के साथ आईआईटी कानपुर का भी सहयोग मिल रहा है। 

भावनात्मक अभियान के रूप में विकसित करने की पहल

कभी दादी-नानी के दिए सिक्कों की रखवाली करने वाली मिट्टी की गुल्लक अब नए दौर में बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। जिला प्रशासन ने इसे केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि संस्कार, परिवार और स्थानीय कला से जुड़े भावनात्मक अभियान के रूप में विकसित करने की पहल की है। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि गुल्लक बच्चों में बचत की आदत विकसित करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बढ़ते अनावश्यक खर्चों के बीच बच्चों को आर्थिक अनुशासन और बचत का संस्कार देना समय की आवश्यकता है।

डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष कार्य

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने बताया कि योगी सरकार की मंशा के अनुरूप स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह प्रयास किया जा रहा है। बिठूर की माटीकला को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष कार्य हो रहा है ताकि कारीगरों को बेहतर आय और व्यापक पहचान मिल सके।

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कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप किया जा रहा प्रशिक्षित

आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट के तहत कारीगरों को तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। परियोजना की कॉर्डिनेटर रीता सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पाद निर्माण नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और नई पीढ़ी के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना भी है। वहीं प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर शिखा तिवारी ने बताया कि कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है। सिरामिक डिजाइनर शैली संगल बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कार्टून, पशु-पक्षी और पारंपरिक आकृतियों वाली आकर्षक गुल्लकें डिजाइन कर रही हैं।

सरकारी कार्यक्रमों में उपहार के रूप में भी किया जाएगा प्रोत्साहित

बिठूर के कुम्हार राम रतन ने बताया कि पहले मिट्टी की गुल्लकों की मांग लगातार घट रही थी, लेकिन नए डिजाइन आने के बाद लोगों की रुचि फिर बढ़ने लगी है। इससे स्थानीय कारीगरों में नई उम्मीद जगी है।

जिलाधिकारी ने बताया कि इन गुल्लकों को सरकारी कार्यक्रमों में स्मृति-चिह्न और उपहार के रूप में भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और बिठूर की पारंपरिक माटीकला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।

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