छत्तीसगढ़

रायपुर: आर्थिक वृद्धि के लिए मत्स्य किसानों को उन्नत तकनीक अपनाने की सलाह, मंत्री रामविचार नेताम का बयान

By Admin|22 Nov 2025, 12:52 PM
f X W

रायपुर : मत्स्य किसानों को आर्थिक समृद्धि हेतु नवीन तकनीक एवं कौशल विकास को अपनाने की जरूरत: मंत्री  रामविचार नेताम

Advertisement
Advertisement

मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर

कृषि मंत्री विश्व मात्स्यिकी दिवस पर आयोजित कृषक संगोष्ठी में हुए शामिल

रायपुर

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री  रामविचान नेताम विश्व मात्स्यिकी दिवस पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रति वर्ष 21 नवंबर को विश्व मात्स्किी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन के महत्व, मछुआ समुदाय के अधिकारों, आर्थिक आजिविका, खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत एवं समुदाय सशक्तिकरण हेतु जागरूकता लाना है।  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत जयंती मना रहा है। राज्य में प्राकृतिक रूप से मछली पालन के स्त्रोत प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। मत्स्य किसानों के विकास के लिए आवश्यकता है केवल नवीन तकनीक, मानव कौशल विकास, आर्थिक प्रोत्साहन एवं सहायता की।

मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर

कृषि मंत्री  नेताम ने बताया कि शासन ने राज्य निर्माण के पश्चात राज्य एवं केन्द्र की विभिन्न योजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नील काति, प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के माध्यम से मछली पालन विकास के सतत् प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में कुल 1,30,001 जल स्त्रोत (2.039 लाख हेक्टेयर) उपलब्ध है जिनमें 98 प्रतिशत् में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन हो रहा है। 3571 किलोमीटर का नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है। सघन मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र निर्मित किया जा रहा है, अब तक कुल 7580 हेक्टर जलक्षेत्र निजी क्षेत्र में अतिरिक्त निर्मित हो चुका है।

READ ALSO  CG : माय भारत युवा स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न…

मछली पालन हेतु गुणतत्ता युक्त मत्स्य बीज एक आधारभूत आवश्यकता है। राज्य को मत्स्य बीज के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु निरंतर प्रयास जारी है। अब तक कुल 82 नवीन हैचरी निर्मित कर 120 हैचरियों के माध्यम से 583 करोड़ मत्स्य बीज प्रति वर्ष उत्पादित हो रहा है, एवं राज्य देश में 6 वें स्थान पर है। हमारा राज्य मत्स्य बीज उत्पादन में न सिर्फ आत्मनिर्भर हुआ अपितु अन्य राज्यों को निर्यात भी हो रहा है। 

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना

मंत्री  नेताम ने कहा कि विपणन व्यवस्था को सुदृढ बनाने एवं उपभोक्ता तक ताजी मछली पहुंचाने के लिए 1008 मोटर साइकल, आईस बॉक्स, 10 थी व्हीलर एवं 05 इन्सुलेटेड ट्रक, 114 वाहन (लाइव फिश वेडिंग सेन्टर) वितरित किए गए। रायपुर दुर्ग बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना की गई। मंत्री  नेताम ने इस मौके पर मछुआ संघ की ओर से हितग्राहियों को लाभांश राशि का चेक प्रदान किया। 

मत्स्य पालन बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष  भरत मटियारा और रायपुर ग्रामीण विधायक  मोतीलाल साहू ने भी सम्बोधित किया। मछलीपालन पालन विभाग के संचालक  एमएस नाग ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि भारत के मध्यस्थल पर स्थित प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन विकास काफी प्रगति पर है। राज्य में उपलब्ध जल संसाधन की दृष्टि से मछली पालन एक विशिष्ट स्थान रखता है, राज्य की भौगोलिक एवं कृषि जलवायु स्थितियां भी मछलीपालन हेतु उपयुक्त है। यह ग्रामीण क्षेत्रों की बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को मछलीपालन की आधुनिक तकनीकी पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63 हजार 280 सदस्य मत्स्य पालन कर रहे हैं।

READ ALSO  CG : DMF के निर्माण कार्यों में गड़बड़ी पर कलेक्टर की सख्ती ...

संगोष्ठी में मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष  नेहरू निषाद, मछुआ कल्याण बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष  बसंत तारख और  रामकृष्ण धीवर सहित बड़ी संख्या में मत्स्य किसान शामिल थे।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins