डोंगरगांव , भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में सोमवार को प्रातः 9 बजे श्वेतांबर जैन समाज की साध्वी आज्ञांजना श्रीजी मसा., साध्वी आगमरूचिश्रीजी मसा आदि ठाणा–2 का नगर में मंगल प्रवेश हुआ। नगर सीमा से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित ब्राह्मण समाज भवन से प्रारंभ हुई मंगल यात्रा मुख्य मार्ग, श्रीराम चौक, संजय चौक व सदर लाइन होते हुए शांतिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर पहुंची। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पदयात्रा में शामिल होकर धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में पार्श्व महिला मंडल, समता मंडल एवं सुधर्म मंडल ने मंगलाचरण व स्वागत गीत प्रस्तुत किए।
अपने प्रथम उद्बोधन में साध्वी आज्ञांजनाश्रीजी मसा ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीने का प्रवास नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने, जीवन को दिशा देने और धर्म से जुड़ने का अनुपम अवसर है। वर्षभर में यही वह समय है, जब जितना अधिक धर्म, ध्यान, स्वाध्याय और संयम का लाभ लिया जाए, वह जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है। जैसलमेर से डोंगरगांव तक की लंबी पदयात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में उनका यह प्रथम आगमन है।
चातुर्मास का अधिकतम लाभ प्राप्त करें: नए प्रदेश और नए वातावरण को लेकर मन में स्वाभाविक जिज्ञासा थी, किंतु जैसे-जैसे विहार आगे बढ़ता गया, श्रद्धालुओं का प्रेम, आत्मीयता और धर्म के प्रति समर्पण देखकर सभी संशय समाप्त हो गए। कहा कि डोंगरगांव के श्रावक-श्राविकाओं का उत्साह देखकर विश्वास और भी दृढ़ हुआ है कि यह चातुर्मास अविस्मरणीय बनेगा।
