CG : तोता, कछुआ पालने पर हो सकती है जेल …
रायपुर। राजधानी में तोतों और कछुओं का अवैध कारोबारी काफी सक्रिय हैं। कानूनी पाबंदियों के बावजूद, पक्षियों को बाज़ारो में अवैध तरीके से बेचे खरीदे जा रहे हैं साथ ही अब ऑनलाइन माध्यमों से इन संरक्षित जीवों की खरीद-फरोख्त की जा रही है। वन विभाग की कार्यशैली से महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजधानी में काफी तादात में कछुए तोते धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं.लेकिन विभाग खामोश है।
हालाँकि कल बिलासपुर में प्रतिबंधित कछुए बेचने वाले को पकड़ने के लिए विभाग के एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर पेट शॉप में भेजा गया, कर्मचारी ने तय कीमत पर एक कछुआ खरीदकर इसकी पुष्टि की, जिसके बाद टीम ने दुकान पर छापा मारा और कछुए को बरामद किया। आरोपित के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया। अदालत ने आरोपित को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। मामला बिलासपुर के जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित पेट पाइंट शाप पर वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर चार इंडियन रूफ्ड टर्टल (कछुए) जब्त किए और दुकान संचालक को गिरफ्तार कर लिया।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर ये कछुए आरोपित के दुकान में कैसे पंहुचा और जिन लोगों ने पहले खरीद कर पाल रहे हैं क्या उन पर भी कार्रवाही होगी या सिर्फ दुकानदार पर ही कार्रवाई कर विभाग इतिश्री कर लेगी। गौरतलब है कि कछुओं की अवैध बिक्री की सूचना राज्य उडऩदस्ता को मिली थी। सूचना के आधार पर उडऩदस्ता की टीम शहर पहुंची और बिलासपुर वन परिक्षेत्र के साथ संयुक्त कार्रवाई की। कार्रवाई से पहले विभाग के एक वन कर्मचारी को ग्राहक बनाकर दुकान पर भेजा गया। कछुआ अनूसूची एक का वन्य जीव है। इसकी खरीदी व बिक्री दोनों प्रतिबंधित है। इस सख्त आदेश का कुछ दुकान संचालक उल्लंघन कर रहे हैं। जिन-जिन जगहों पर चोरी-छिपे बिक्री होती है, उनकी जानकारी विभाग की टीम खंगाल रही है। इसी के तहत ही बिलासपुर के जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित पेट पाइंट नामक एक शाप में कछुआ बिकने की सूचना मिली।
राज्य उडऩदस्ता ने पहले ग्राहक बनकर शाप के संचालक सिंधी कालोनी निवासी दीपक लाल चंदानी से बात की। उसने कछुए के होने की पुष्टि की और यह भी कहा जितना चाहे, उतना उपलब्ध करा देगा। इसके बाद उन्होंने छापामार कार्रवाई करने की योजना बनाई। टीम के सदस्य बिलासपुर वन परिक्षेत्र कार्यालय पहुंचे और पूरी जानकारी दी। इसके बाद एक वनकर्मी को कछुआ खरीदने के लिए भेजा। वह कर्मी शाप में गया और कछुआ खरीदकर बाहर निकलते ही अधिकारियों को सूचना दी।जाँच के दौरान उनको शाप के अंदर से चार कछुए बरामद हुए। जिसे जब्त करने के साथ संचालक को भी पकड़ लिया गया और वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया। आरोपित पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
वन विभाग के अनुसार भारतीय छतदार कछुआ (इंडियन रूफ्ड टर्टल) भारत, नेपाल और बांग्लादेश की नदियों, तालाबों तथा अन्य मीठे पानी के जलाशयों में पाया जाने वाला एक जलीय जीव है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में इस प्रजाति का शिकार, खरीद-फरोख्त और बिना वैध अनुमति के पालन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रतिबंधित है। इसके अवैध व्यापार पर कानूनी कार्रवाई का प्राविधान है। यही कारण है कि इस मामले को गंभीरता से लेते कार्रवाई की गई है।
गिरफ्तारी के बाद वन विभाग ने आरोपित से पूछताछ की। पूछताछ में उसने बताया कि वह भारतीय छतदार कछुओं को नागपुर से खरीदकर बिलासपुर लाया था। आरोपित के बयान के आधार पर वन विभाग ने नागपुर वन विभाग को मामले की जानकारी उपलब्ध करा दी है, ताकि कछुओं की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के अवैध व्यापार की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। एक कछुए की कीमत 1500 रुपये वन विभाग की कार्रवाई में सामने आया कि भारतीय छतदार कछुओं की अवैध बिक्री 1500 रुपये प्रति कछुए के हिसाब से की जा रही थी। छापेमारी से पहले विभाग के एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर दुकान पर भेजा गया। उसने तय कीमत 1500 रुपये में एक कछुआ खरीदकर इसकी पुष्टि की। मजे की बाअगर कोई घायल या बीमार पक्षी मिलता है, तो आप उसे इलाज के लिए सिर्फ 48 घंटे ही अपने पास रख सकते हैं। इसके बाद आपको तुरंत इसकी सूचना वन विभाग या नजदीकी पुलिस थाने में देनी होगी। इसके आलावा यदि किसी को कोई जंगली पक्षी पिंजरे में कैद दिखाई दे, तो इसकी शिकायत सीधे वन विभाग या पशु कल्याण बोर्ड से किया जा सकता है।
