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CG : दहेज लोभियों पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, पति और सास-ससुर को 1 लाख जमा करने के निर्देश …

By kadwaghut|04 Jun 2026, 11:14 AM
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बिलासपुर। दहेज प्रताड़ना और शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति, सास और ससुर को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने मामले को आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने आरोपी पति अंकुर गौराहा को दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि राशि जमा करने की शर्त पूरी होने पर ही 29 जून 2026 तक गिरफ्तारी पर रोक लागू रहेगी। यदि निर्धारित समय सीमा में रकम जमा नहीं की गई तो यह राहत स्वतः समाप्त मानी जाएगी।

मामला बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौराहा, उनके पिता राकेश गौराहा और माता रेखा गौराहा से जुड़ा है। तीनों के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौराहा ने सारंगढ़ थाना में दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। एफआईआर के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने और एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना था कि एफआईआर काफी देर से दर्ज कराई गई और उसमें दहेज मांग या क्रूरता से जुड़े ठोस आरोप नहीं हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि मामला पारिवारिक और वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, इसलिए इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। अदालत ने पति-पत्नी दोनों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि एक लाख रुपये जमा करने के बाद उसकी रसीद संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि भविष्य में दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा की गई राशि को उसी समझौते का हिस्सा माना जा सकता है।

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