CG : छत्तीसगढ़ में ओला इलेक्ट्रिक को परिवहन विभाग का नोटिस, सब्सिडी पर भी उठे सवाल …
रायपुर : छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के परिवहन विभाग ने ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी को नोटिस जारी किया है। कंपनी से जुड़े लगभग 3,000 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन लंबित होने और बड़ी संख्या में पात्र वाहनों के लिए सरकारी सब्सिडी के आवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। परिवहन विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय-सीमा में स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
3 हजार वाहनों का पंजीयन लंबित, परिवहन विभाग ने जताई नाराजगी परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में ओला इलेक्ट्रिक से जुड़े लगभग तीन हजार वाहनों का पंजीयन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। बड़ी संख्या में पंजीयन लंबित रहने से वाहन खरीदने वाले ग्राहकों की परेशानी बढ़ सकती है। वाहन खरीदने के बाद उसका विधिवत पंजीयन कराना आवश्यक होता है। पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से वाहन मालिकों को स्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र मिलने में देरी हो सकती है। इसके अलावा वाहन से संबंधित अन्य औपचारिकताओं में भी परेशानी आने की आशंका रहती है। परिवहन विभाग का कहना है कि वाहन बिक्री के बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा करना जरूरी है। ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए संबंधित कंपनी को अपनी जिम्मेदारियां समय पर पूरी करनी चाहिए।
ईवी सब्सिडी के आवेदन भी लंबित ओला इलेक्ट्रिक से जुड़ा मामला केवल वाहनों के पंजीयन तक सीमित नहीं है। विभाग की जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए निर्धारित सरकारी सब्सिडी के आवेदन भी प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए ईवी नीति लागू की है। इसके तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले वाहन खरीदारों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता है। ऐसे में सब्सिडी आवेदन समय पर जमा नहीं होने से पात्र वाहन मालिकों को योजना का लाभ प्राप्त करने में देरी हो सकती है। राज्य की ईवी नीति के अनुसार, पात्र वाहनों के लिए खरीद प्रोत्साहन का प्रावधान है। मई 2025 में किए गए संशोधन के बाद अधिकतम सब्सिडी की सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई थी। हालांकि, वास्तविक सब्सिडी वाहन की श्रेणी, कीमत और लागू पात्रता शर्तों पर निर्भर करती है।
मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत जारी किया गया नोटिस परिवहन आयुक्त कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कंपनी की ओर से वाहन पंजीयन और सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं में अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने पर मोटरयान अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस के माध्यम से ओला इलेक्ट्रिक को अपने स्तर पर लंबित मामलों का स्पष्टीकरण देने और निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग जानना चाहता है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के पंजीयन की प्रक्रिया लंबित क्यों है और पात्र इलेक्ट्रिक वाहनों के सब्सिडी आवेदन समय पर प्रस्तुत क्यों नहीं किए गए। कंपनी के जवाब के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।
संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो हो सकती है वैधानिक कार्रवाई परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वाहन पंजीयन और सरकारी सब्सिडी से संबंधित प्रक्रियाओं का समय पर पालन होना अनिवार्य है। यदि कंपनी निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं देती है अथवा जांच में संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ प्रचलित नियमों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, फिलहाल यह मामला नोटिस जारी करने और स्पष्टीकरण मांगने के चरण में है। कंपनी पर जुर्माना लगाने, पंजीयन संबंधी अधिकार निलंबित करने या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई का निर्णय होने की पुष्टि नहीं हुई है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों की बढ़ सकती है परेशानी इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं के लिए पंजीयन, बीमा और सरकारी प्रोत्साहन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। कई ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय संभावित सरकारी सब्सिडी को ध्यान में रखकर अपना बजट तैयार करते हैं। ऐसे में आवेदन लंबित रहने से उनकी आर्थिक योजना प्रभावित हो सकती है। वाहन मालिकों के लिए यह भी जरूरी है कि उन्हें आवेदन की वर्तमान स्थिति, आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया पूरी होने की संभावित अवधि के बारे में स्पष्ट जानकारी मिले। जिन ग्राहकों को पंजीयन या सब्सिडी से जुड़ी समस्या है, वे संबंधित डीलर या कंपनी के ग्राहक सहायता केंद्र से लिखित जानकारी मांग सकते हैं। इसके अतिरिक्त परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सेवाओं के माध्यम से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अब ओला इलेक्ट्रिक के जवाब पर टिकी निगाहें परिवहन विभाग की कार्रवाई के बाद अब सभी की निगाहें कंपनी के जवाब और लंबित मामलों के समाधान पर हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लगभग तीन हजार वाहनों के पंजीयन में देरी क्यों हुई और सब्सिडी के आवेदन समय पर जमा नहीं होने के पीछे क्या वजह रही। ग्राहकों के लिए राहत तभी होगी, जब पंजीयन से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी होंगी और पात्र वाहन मालिकों के सब्सिडी आवेदन नियमानुसार आगे बढ़ेंगे। फिलहाल परिवहन विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इलेक्ट्रिक वाहन बेचने वाली कंपनियों को बिक्री के बाद की औपचारिकताओं के प्रति भी जिम्मेदारी निभानी होगी।




