छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव: IPS अंकिता शर्मा की AK-47 फायरिंग का वीडियो वायरल, पूर्व सैन्य अधिकारी ने उठाए सवाल…..

By kadwaghut|21 Oct 2026, 10:35 PM
f X W

कौन हैं पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों?

केजेएस ढिल्लों भारतीय सेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें ‘टाइनी ढिल्लों’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह श्रीनगर स्थित सेना की 15वीं कोर, जिसे चिनार कोर कहा जाता है, के कमांडर रहे। इसके अलावा उन्होंने रक्षा खुफिया एजेंसी के महानिदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। वह जनवरी 2022 में सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा का AK-47 राइफल से फायरिंग करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पारंपरिक साड़ी पहने IPS अधिकारी के इस वीडियो को लेकर भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने हथियार संभालने के तरीके, आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव की पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा भी मौजूद थीं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में वह शस्त्र पूजन के बाद AK-47 राइफल से फायरिंग करती दिखाई दे रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने नौ राउंड फायर किए।

READ ALSO  बिलासपुर के जेडी कार्यालय में सहायक संचालकों की संख्या बढ़ी, 3 पदों पर 7 अधिकारी पदस्थ

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, फायरिंग के दौरान निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी और विभागीय जांच आवश्यक है।

केजेएस ढिल्लों ने क्या उठाए सवाल?

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो को लेकर चिंता जताई। उन्होंने हथियार की दिशा, आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा और बुनियादी वेपन हैंडलिंग प्रक्रियाओं के पालन पर सवाल उठाए।

ढिल्लों ने इस घटनाक्रम को ‘Authority Without Responsibility’ यानी ‘जिम्मेदारी के बिना अधिकार’ से जोड़ते हुए ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

हालांकि, ये आपत्तियां पूर्व सैन्य अधिकारी की ओर से उठाए गए सवाल हैं। किसी नियम के उल्लंघन या संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक जांच अथवा विभागीय बयान के आधार पर ही की जा सकती है।

हथियार की सुरक्षा और प्रशिक्षण पर बहस

आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल करते समय हथियार की नली की दिशा पर नियंत्रण रखना और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बुनियादी सावधानियों में शामिल है। सार्वजनिक या सामूहिक आयोजन के दौरान फायरिंग की स्थिति में निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र, अधिकृत प्रक्रिया और आवश्यक इंतजामों का पालन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।

ढिल्लों ने वीडियो में दिखाई देने वाले हथियार संचालन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर फायरिंग स्थल की पूरी परिस्थितियों और सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन करना संभव नहीं है।

क्या साड़ी पहनकर फायरिंग करना नियमों का उल्लंघन है?

इस मामले में अधिकारी की पारंपरिक पोशाक को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, केवल साड़ी पहनकर फायरिंग करने से अपने आप किसी नियम का उल्लंघन साबित नहीं होता। इसके लिए संबंधित विभाग के ड्रेस कोड, कार्यक्रम की परिस्थितियों और हथियार के इस्तेमाल से जुड़े लागू नियमों की जानकारी जरूरी है।

READ ALSO  राजनांदगांव : 5 बेड की कैंसर यूनिट शुरू, कीमोथैरेपी सुविधा...

कौन हैं IPS अंकिता शर्मा?

अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की IPS अधिकारी हैं। वह मूल रूप से दुर्ग जिले की रहने वाली हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा अपने तीसरे प्रयास में पास की थी और वर्ष 2017 की परीक्षा में 203वीं रैंक हासिल की थी।

अपने पुलिस करियर के दौरान वह रायपुर में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) सहित विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। उन्होंने खैरागढ़ और सक्ती जैसे जिलों में भी पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं। उनकी कार्यशैली और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसिंग से जुड़े अनुभव के कारण उन्हें मीडिया में ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी संबोधित किया जाता रहा है।

कौन हैं पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों?

केजेएस ढिल्लों भारतीय सेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें ‘टाइनी ढिल्लों’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह श्रीनगर स्थित सेना की 15वीं कोर, जिसे चिनार कोर कहा जाता है, के कमांडर रहे। इसके अलावा उन्होंने रक्षा खुफिया एजेंसी के महानिदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। वह जनवरी 2022 में सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

शस्त्र पूजन और फायरिंग में क्या है अंतर?

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। पुलिस और सैन्य बलों में भी इस अवसर पर हथियारों की पूजा की जाती है। हालांकि, शस्त्र पूजन और वास्तविक फायरिंग दो अलग-अलग गतिविधियां हैं। फायरिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं और अधिकृत व्यवस्थाओं का पालन जरूरी है।

READ ALSO  नगर सैनिकों के लिए खुशखबरी, बढ़ा मासिक मानदेय

फिलहाल, राजनांदगांव में IPS अंकिता शर्मा के फायरिंग वीडियो को लेकर सुरक्षा मानकों और जवाबदेही पर बहस जारी है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या फायरिंग के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी और जांच के तथ्यों को देखना जरूरी होगा।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button