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CG : जिनशासन का सार है नवपद,आराधना में समाहित है सभी तत्व : मुनि संवेगरत्न सागर ..

By kadwaghut|19 Oct 2026, 12:58 PM
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नवपद ओली के प्रथम दिवस की गई अरिहंत पद की आराधना

रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में रविवार 18 अक्टूबर से नव दिवसीय शाश्वत नवपद ओली की आराधना शुरू हुई। मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा के पवन निश्रा में 9 दिनों तक धर्म,ध्यान,भक्ति,जप-तप आराधना का क्रम अविरल रूप से जारी रहेगा। धर्मसभा में मुनिश्री ने नवपद ओली जी का महत्व समझाया। मुनिश्री ने कहा कि नवपद जिन शासन का सार है।

मुनिश्री ने कहा कि जिन शासन में सबसे महत्वपूर्ण नवदिवसीय आराधना नवपद ओली की है। ये आराधना साल में दो बार चैत्र और आसोज माह में की जाती है। यह आराधना जिन शासन का सार है,इसलिए इसे साल में दो बार किया जाता है। 9 पद ओली के प्रथम दिवस अरिहंत पद अर्थात अरिहंत परमात्मा की आराधना की जाती है। अरिहंत परमात्मा का जप और तप किया जाता है। जप और तप एक बार किया जा सकता है लेकिन ध्यान अनेकों बात करना चाहिए। वैसे अरिहंत परमात्मा का ध्यान तो निरंतर प्रतिदिन होना चाहिए। नवपद की आराधना में जिन शासन का सभी तत्व समाहित है।

चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि शाश्वत नवपद ओली की आराधना के प्रथम दिवस धर्मसभा में मुनिश्री के मुखारविंद से श्रावक-श्राविकाओं ने श्रीपाल महाराजा और मयना सुंदरी का चारित्र्य वर्णन श्रवण किया। किस तरह से दोनों ने सिद्ध चक्र की आराधना कर मोक्ष को पाया था।

उन्होंने बताया कि शाश्वत नवपद ओली का पर्व जैन समाज द्वारा अनादि काल से मनाया जा रहा है। अनंत लब्धि निधान गौतम स्वामी जी ने राजगृह नगरी में श्रेणिक महाराज को श्रीपाल महाराजा और मयना सुंदरी का चारित्र्य वर्णन किया था। कैसे दोनों ने नवपद की आराधना की थी और कैसे मोक्ष की प्राप्ति की थी।

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9 दिन किया जाएगा आयम्बिल तप
नवपद ओली के 9 दिवस आयम्बिल तप किया जाएगा। एक समय,एक स्थान पर बैठकर भोजन ग्रहण किया जाएगा। प्रथम दिवस अरिहंत परमात्मा की आराधना के साथ ही सफेद धान से बनी खाद्य सामग्री का सेवन किया गया। सफेद रंग परमात्मा का है इसलिए आज सफेद अर्थात चावल की खाद्य पदार्थ ग्रहण किए गए। केवल एक धान ग्रहण किया जाता है। 6 विघय में तेल, घी, दूध, दही, मक्खन,शक्कर का त्याग रहता है। बगैर तेल,मसाला,खटाई के सादा भोजन ही ग्रहण किया जाता है।

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