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अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार

By Admin|12 Oct 2026, 7:16 PM
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प्रदेश में 3.67 करोड़ से अधिक परिवारों की दहलीज तक निरंतर पहुंच रहा राशन, बिना किसी भेदभाव पहुंचा योजनाओं का लाभ

तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में अंत्योदय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार निरंतर और समर्पित भाव से कार्य कर रही है। भुखमरी और कुपोषण को समाप्त कर हर नागरिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के संकल्प का ही नतीजा है कि प्रदेश का सार्वजनिक वितरण तंत्र आज देश के सबसे विश्वसनीय मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। खाद्य एवं रसद विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर में कुल 3,67,52,818 कार्डधारक परिवारों के 14,71,04,181  लाभार्थियों तक नियमित और पारदर्शी रूप से खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के संवेदनशील विजन के चलते बिना किसी जाति, वर्ग या क्षेत्रीय भेदभाव के राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे करोड़ों वंचित परिवारों को सुरक्षा और आत्मसम्मान दोनों प्राप्त हुए हैं।

लखनऊ मंडल में रिकॉर्ड 1.72 करोड़ लाभार्थी: जन-जन तक सरकारी गारंटी पहुंचाने में अव्वल
प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में लखनऊ मंडल खाद्यान्न सुरक्षा के कुशल क्रियान्वयन में शीर्ष स्थान पर उभरा है। मंडल के छह जनपदों में कुल 45,24,479 राशन कार्ड धारक परिवारों के 1,72,13,915 सदस्यों को पोषण सुरक्षा का सीधा और नियमित लाभ मिल रहा है।

 सीतापुर: 9,25,642 राशन कार्डधारक 34,66,349 लाभार्थी
 लखीमपुर खीरी: 8,67,320 राशन कार्डधारक 31,20,657 लाभार्थी
 हरदोई: 8,00,618 राशन कार्डधारक 31,06,086 लाभार्थी
 लखनऊ: 7,56,120 राशन कार्डधारक 30,23,717 लाभार्थी
 उन्नाव: 6,14,246 राशन कार्डधारक 23,11,523 लाभार्थी
 रायबरेली: 5,60,533 राशन कार्डधारक 21,85,583 लाभार्थी

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सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में 31 से 34 लाख से अधिक नागरिकों का यह शत-प्रतिशत कवरेज प्रमाणित करता है कि योगी सरकार की प्रशासनिक मशीनरी दूरदराज के गांवों तक निरंतर सक्रियता से काम कर रही है।

तकनीक और ईमानदारी से खुला हक का ताला: ई-पॉस और बायोमेट्रिक से बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त
पूर्ववर्ती सरकारों में राशन वितरण के दौरान घटतौली, अपात्रों के कार्ड और कालाबाजारी की जो समस्याएं दशकों से बनी हुई थीं, योगी सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उन्हें पूरी तरह जड़ से समाप्त कर दिया है। प्रदेश की प्रत्येक उचित दर दुकान पर ई-पॉस मशीनों की स्थापना और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाकर वितरण को पूर्णतः पारदर्शी कर दिया गया है। तकनीक के इस सटीक समन्वय से फर्जीवाड़े पर विराम लगा है और यह सुनिश्चित हुआ है कि गोदाम से निकलने वाले अनाज का एक-एक दाना केवल और केवल असली जरूरतमंद की थाली तक ही पहुंचे।

एक देश, एक राशन कार्ड से मिली नई मजबूती: कामगारों का पलायन भी नहीं रोक पाएगा निवाला
रोजी-रोटी और रोजगार के सिलसिले में अपने गृह जनपद या राज्य से बाहर जाने वाले गरीब कामगारों व प्रवासी श्रमिकों के लिए यह व्यवस्था वरदान साबित हुई है। योगी सरकार ने केंद्र की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति के साथ कदमताल करते हुए राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी को इतने सरल और सुगम तरीके से लागू किया है कि कोई भी लाभार्थी राज्य के किसी भी जिले या देश के किसी भी कोने से अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकता है। इस पहल ने श्रमिकों को घर-परिवार से दूर रहने पर भी खाद्य सुरक्षा का अटूट भरोसा दिया है।

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अंत्योदय से आत्मनिर्भरता की डगर: कमजोर तबकों को मजबूत सहारा, राशन बना बराबरी का आधार
योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम और पात्र गृहस्थी परिवारों को प्रति यूनिट 5 किलोग्राम अनाज का नियमित आवंटन सामाजिक विषमता की खाई को पाटने का सशक्त माध्यम बना है। अनाज की चिंता से मुक्त होकर गरीब परिवार अब अपनी बचत को बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए साधनों में लगा रहे हैं। निरंतर नीतिगत सुधारों, जमीनी निगरानी और जनहितैषी प्राथमिकताओं के बल पर योगी सरकार का यह कल्याणकारी मॉडल आज प्रदेश के 14 करोड़ से अधिक नागरिकों के विश्वास और सम्मान का सबसे मजबूत आधार बन चुका है।

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