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बिहार के इन 9 देवी मंदिरों की है खास मान्यता, नवरात्र में जरूर करें मां के दर्शन

By Admin|12 Oct 2026, 3:43 PM
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पटना

 Shakti peeth in Bihar शारदीय नवरात्र हो या चैत्र नवरात्र, मां दुर्गा की भक्ति में डूबा बिहार अपनी समृद्ध धार्मिक परंपराओं के लिए खास पहचान रखता है। राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थित देवी मंदिरों में सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दौरान इन मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है।

Devi Temple in Bihar कहीं मां के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, तो कहीं विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। आइए, तस्वीरों के जरिए बिहार के नौ प्रसिद्ध शक्तिस्थलों और देवी मंदिरों की महिमा जानते हैं।

1. Maa Mundeshwari Temple: कैमूर की पहाड़ियों पर विराजती हैं मां
Maa Mundeshwari Temple बिहार के कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर को देश के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।

यहां मां मुंडेश्वरी की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाती है। मंदिर की प्राचीन स्थापत्य शैली और धार्मिक परंपराएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।

नवरात्र के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस मंदिर की एक खास पहचान यहां प्रचलित पारंपरिक बलि-विधि है, जिसमें रक्तपात के बिना अनुष्ठान किया जाता है। आस्था और इतिहास का संगम होने के कारण यह मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है।

2. Patan Devi Temple: पटना की बड़ी और छोटी पटनदेवी की महिमा
Bari Patan Devi Temple राजधानी पटना में स्थित बड़ी पटनदेवी और छोटी पटनदेवी मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं। बड़ी पटनदेवी को बिहार के प्रमुख शक्तिस्थलों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान मां सती से जुड़ी पौराणिक परंपराओं के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है।

नवरात्र में दोनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचने लगते हैं। राजधानी में स्थित होने के कारण यहां बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी भक्त आते हैं। मां के दर्शन कर श्रद्धालु सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
3. Maa Tara Chandi Temple: सासाराम में मां के दर्शन के लिए उमड़ते हैं भक्त
रोहतास जिले के सासाराम में स्थित मां तारा चंडी मंदिर बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है। कैमूर पहाड़ी क्षेत्र के निकट स्थित इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यहां मां तारा की पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।

स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर को विशेष स्थान प्राप्त है। सासाराम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है।

4. Maa Mangla Gauri Temple: गया में माता के दर्शन का विशेष महत्व
गया स्थित मां मंगला गौरी मंदिर बिहार के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के कारण देशभर में जाना जाता है।

मान्यता है कि यहां माता की पूजा करने से भक्तों को सुख, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

विशेष रूप से सावन और नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। भक्त माता को चुनरी, फूल और प्रसाद अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।

गया के धार्मिक पर्यटन स्थलों में इस मंदिर का महत्वपूर्ण स्थान है। मां मंगला गौरी के दर्शन के लिए बिहार के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

5. Aami Mandir: सारण में मां अंबिका के दरबार की अलग पहचान
सारण जिले के आमी गांव में स्थित मां अंबिका मंदिर क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

गंगा नदी के निकट स्थित इस मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

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संतान सुख और मनोकामना पूर्ति की कामना से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आमी मंदिर सारण जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

6. Maa Chandika Sthan: मुंगेर में शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र
मुंगेर स्थित मां चंडिका स्थान बिहार के प्रमुख देवी मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। श्रद्धालु यहां मां चंडिका की पूजा कर परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।

नवरात्र के दिनों में मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। भक्त सुबह से ही दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

मुंगेर और आसपास के जिलों के लोगों के बीच इस मंदिर की विशेष मान्यता है। धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था के कारण चंडिका स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा है।

7. Maa Ugratara Temple: महिषी में विराजती हैं मां उग्रतारा
सहरसा जिले के महिषी में स्थित मां उग्रतारा मंदिर बिहार के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में शामिल है। यह मंदिर धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां मां उग्रतारा की आराधना करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। भक्त माता के दर्शन कर सुख, शांति

सारण जिले के आमी गांव में स्थित मां अंबिका मंदिर क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

गंगा नदी के निकट स्थित इस मंदिर का वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

संतान सुख और मनोकामना पूर्ति की कामना से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आमी मंदिर सारण जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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8. Maa Raj Rajeshwari Temple: मुजफ्फरपुर में आस्था का प्रमुख केंद्र

मुजफ्फरपुर स्थित मां राजराजेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था रखता है। यहां माता की पूजा-अर्चना के लिए सालभर भक्त पहुंचते हैं। नवरात्र के समय मंदिर में सजावट, आरती और विशेष अनुष्ठानों के कारण भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है।

श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस मंदिर का विशेष महत्व है। मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह मंदिर देवी उपासना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

9. Maa Kali Temple: फारबिसगंज में मां काली के दर्शन की विशेष मान्यता
अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित मां काली मंदिर सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मां काली की आराधना करने के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता की पूजा करने से भक्तों को साहस, शक्ति और संकटों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

नवरात्र के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। भक्त माता को फूल, प्रसाद और चुनरी अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। सीमांचल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इस मंदिर का खास स्थान है।
नवरात्र में इन मंदिरों के दर्शन से जुड़ी है बिहार की धार्मिक विरासत

बिहार के ये नौ देवी मंदिर राज्य की समृद्ध धार्मिक परंपरा, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करते हैं। पटना की पटनदेवी से लेकर कैमूर की मुंडेश्वरी और सहरसा की उग्रतारा तक, हर मंदिर की अपनी अलग पहचान और स्थानीय मान्यताएं हैं।

नवरात्र के अवसर पर इन मंदिरों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। जो लोग इन धार्मिक स्थलों तक नहीं पहुंच पाते, वे तस्वीरों के माध्यम से इनके दर्शन कर सकते हैं और बिहार की आध्यात्मिक विरासत को करीब से जान सकते हैं।

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