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बिहार में गंगा-गंडक का रौद्र रूप, बाढ़ से 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान; 11 जिले प्रभावित

By Admin|10 Oct 2026, 1:53 PM
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 पटना
 गंगा, गंडक, सोन एवं कोसी समेत बिहार की प्रमुख नदियों में कई वर्ष उपरांत रिकॉर्ड पानी आने से राज्य को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। इसमें आधे से अधिक क्षति जल संसाधन विभाग के तटबंधों के टूटने एवं क्षतिग्रस्त होने से हुई है।

हालांकि, यह नुकसान का प्रारंभिक आकलन है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट मिलना अभी शेष है। ऐसे में अंतिम आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

बाढ़ का कहर दो चरणों में देखने को मिला। पहले चरण में 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच बिहार की नदियों के राज्य से बाहर स्थित जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इस दौरान 30 रेनगेज स्थलों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई।

इसके कारण गंगा नदी ने दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दरधा नदी के कोल्हाचक में भी नया रिकॉर्ड बना।

दूसरे चरण में 24 से 30 सितंबर के बीच नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश से गंडक नदी में पानी का दबाव काफी बढ़ गया। इस दौरान 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया।

गंडक नदी ने बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में उच्चतम जलस्तर का नया रिकॉर्ड बनाया। पानी के भारी दबाव के कारण नदी के छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।

पहले चरण में 9617 करोड़ की क्षति
पहले चरण की बाढ़ से 9617 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें जल संसाधन विभाग ने तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने से 5472 करोड़ रुपये की क्षति बताई है।

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आपदा प्रबंधन विभाग ने 2710 करोड़, ग्रामीण कार्य विभाग ने 1062 करोड़, कृषि विभाग ने 270 करोड़, पथ निर्माण विभाग ने 76 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 27 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी है।

वहीं, दूसरे चरण की बाढ़ से 1054 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन हुआ है। इसमें जल संसाधन विभाग की ओर से 1027.34 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से 26.81 करोड़ रुपये की क्षति बताई गई है। दोनों चरणों के विभागीय आकलन को जोड़ने पर नुकसान की राशि 10,671 करोड़ रुपये होती है।

तटबंधों की मरम्मत के लिए मांगे करीब 1027 करोड़
गंडक नदी में तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड प्रभावित हुए।

जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए 28 करोड़ 65 लाख रुपये, चंपारण, तिरहुत एवं अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 973 करोड़ 69 लाख रुपये और बाढ़ पूर्व मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की है।

82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद, 26 की मौत
बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने 11 जिलों में 82 हजार 186 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का अनुमान लगाया है।

खेतों में पानी भरने और फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। फसल क्षति का अंतिम आकलन होने के बाद प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता का दायरा स्पष्ट होगा।

दोनों चरणों की बाढ़ में राज्य में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई। सारण में सर्वाधिक 15 लोगों की मौत हुई है।

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इसके अलावा पश्चिम चंपारण में तीन, मुंगेर में चार, भोजपुर में दो और भागलपुर में दो लोगों की मौत हुई है। राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दे रही है।

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