मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि संबंधी लंबित प्रकरणों के समाधान हेतु राजस्व अभियान की पुनः शुरुआत की घोषणा की

By Admin|09 Dec 2025, 12:23 PM
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भूमि संबधी लंबित प्रकरणों के लिए पुनः चलाया जाये राजस्व अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राजस्व अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य शीघ्रता से करें पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राजस्व न्यायालय का कार्य प्रशंसनीय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजस्व विभाग की समीक्षा कर दिए निर्देश

भोपाल 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों और आम नागरिकों के भूमि-संबंधी लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए राजस्व महाभियान पुनः चलाया जाए। इससे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेखों में सुधार जैसे प्रकरणों का तेजी से और पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को महाराजा कन्वेंशन सेंटर खजुराहो में राजस्व विभाग की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि 6 माह से अधिक लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करें। इसके लिए प्राथमिकता से पीठासीन अधिकारियों से संपर्क करें। राजस्व अभिलेखों का डिजिटाइजेशन का कार्य शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। नागरिकों को उनकी भूमि का त्वरित नक्शा और विवरणों की उपलब्धता आसान बनाए। इसके लिए वेबसाइट पर सुविधा उपलब्ध करायें। यह सुविधा अगले दो वर्ष में पूर्ण करें। वेबसाइट से प्राप्त दस्तावेजों को प्रामाणिक बनाए जिससे दस्तावेजों की डुप्लीकेसी रुकेगी। नवीन आवश्यक आबादी भूमि का चिन्हांकन करें। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा बनाएं। भू-अर्जन प्रकरणों के एंड-टू-एंड निराकरण को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया बनाए।

राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी दी। साथ ही आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना बताई। मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव राजस्व  विवेक पोरवाल सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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राजस्व विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां

    राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024–25 में तीन चरणों में राजस्व महाअभियान संचालित किया गया, जिसको एक करोड़ से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने 24 जिलों में राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित और नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की।

    RCMS के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किया गया।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने जियो-फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिहीन फसल गिरदावरी सुनिश्चित की और 3.80 करोड़ सर्वे नंबरों में फसल विवरण को फोटो सहित दर्ज किया।

    स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रदेश में 94% कार्य संपन्न कर आबादी ग्रामों में 39.63 लाख अधिकार अभिलेख वितरित किए गए।

    प्रकरणों की सतत निगरानी के लिए 07 अप्रैल 2025 को 7-सीटर कॉल सेंटर स्थापित किया गया, जिससे 6 माह से लंबित प्रकरणों की संख्या 8963 से घटकर केवल 150 रह गई।

    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए RCMS पोर्टल पर LAMS मॉड्यूल विकसित किया गया।

    राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ की लागत से 438 कार्यालय भवनों की स्वीकृति दी गई, जिनमें से 324 का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

    प्राकृतिक आपदाओं से निपटने एवं प्रभावितों को राहत उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2024–25 में 871 करोड़ 37 लाख का व्यय किया गया तथा 2025–26 में अब तक 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की राशि व्यय की गई।

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    मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत 5281 पटवारी तथा 136 नायब तहसीलदारों की नियुक्ति की गई और 34,069 (100%) अधिकारियों-कर्मचारियों ने IGOT कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024–25 में 1048 करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह किया गया। वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य से अधिक का संग्रहण किया जाएगा।

        अभिनव प्रयोग एवं नवाचार

    साइबर तहसील लागू होने से नामांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस, फेसलेस और क्षेत्राधिकार-मुक्त हो गई और औसत निपटान अवधि 50 दिनों से घटकर 22 दिन हो गई है। साइबर तहसील को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार, नेशनल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025, DILRMP के घटकों को प्रदेश में लागू करने के लिए भूमि सम्मान, LAMS को Skoch Gold जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।

    भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारम्भ किया गया है, जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जा रहा है। यह कार्य सितंबर 2025 से 12 जिलों में शुरू हुआ है। अब तक 1.25 करोड़ पेज स्कैन हो चुके हैं। इससे कृषक स्वयं अपनी भूमि की सर्च रिपोर्ट ज्ञात कर सकेंगे।

    प्रदेश में भू-अभिलेख पोर्टल का नया वर्जन 2.0 दिनांक 1 अगस्त 2025 से शुरू हो गया है। नागरिक अपने मोबाइल पर अपनी भूमि का पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं। मोबाइल ऐप द्वारा भू-अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की जा सकती है।

        आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना

    डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम DPDP Act के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

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    नक्शाविहीन ग्रामों के नक्शे बनाने तथा भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन किया जाएगा।

    नवीन आवश्यक आबादी भूमियों का चिन्हांकन किया जाएगा।

    विश्वास आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया लागू करने की योजना है।

 

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