छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : 23 साल पुराने रिश्वत कांड में पूर्व पटवारी को राहत नहीं: हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा, लेकिन…

By kadwaghut|19 Aug 2026, 11:52 AM
f X W

बिलासपुर: हाईकोर्ट ने जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में काम कराने के बदले 2 हजार रुपए रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व पटवारी माधव सिंह चंदेल की सजा को बरकरार रखा है. हालांकि 23 साल पुराने मामले और आरोपी की उम्र 73 वर्ष होने को देखते हुए कोर्ट ने सजा में कमी की है. जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक साल की सजा को घटाकर 6 महीने और धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत दो साल की सजा को घटाकर एक साल कर दिया.

Advertisement
Advertisement

दरअसल, मामला वर्ष 2003 दुर्ग जिले का है. शिकायतकर्ता अर्जुन साहू ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत की थी कि जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पटवारी माधव सिंह चंदेल 2 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है. शिकायत के बाद एसीबी ने ट्रैप की कार्रवाई की. 31 दिसंबर 2003 को शिकायतकर्ता ने पटवारी को 2 हजार रुपए दिए, जिसके बाद टीम ने उसे पकड़ लिया. नोटों पर फिनॉल्फ्थेलिन पाउडर लगाया गया था और जांच के दौरान रासायनिक परीक्षण में प्रतिक्रिया भी मिली.

निचली अदालत ने 2017 में पटवारी को दोषी ठहराते हुए कुल 3 साल की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रिश्वत की मांग साबित नहीं हुई और ट्रैप के दौरान रकम पटवारी की जेब से नहीं, बल्कि उसके बैग से मिली थी. यह भी कहा गया कि रिश्वत की बातचीत की रिकॉर्डिंग के लिए दिया गया टेप रिकॉर्डर और उसकी ट्रांसक्रिप्शन कोर्ट में पेश नहीं की गई. हाईकोर्ट ने माना कि टेप रिकॉर्डिंग प्राथमिक साक्ष्य के रूप में पेश नहीं हुई, लेकिन अन्य मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से रिश्वत की मांग और रकम स्वीकार करने की बात साबित होती है.

READ ALSO  सुखदेव भगत के बस्तर दौरे से गरमाई सियासत, BJP ने कहा- ‘देखते हैं कितना दमखम है’

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने संदेह से परे अपराध साबित किया है. कोर्ट ने यह भी माना कि राजस्व रिकॉर्ड में सुधार का काम पटवारी के दायित्व में था और इसी काम के लिए रिश्वत मांगी गई थी. इसलिए दोषसिद्धि में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. हालांकि 23 साल पुराने मामले में आरोपी की 73 वर्ष की उम्र और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए सजा कम की गई. हाईकोर्ट ने आरोपी को 30 अक्टूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर शेष सजा भुगतने का निर्देश दिया है.

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins