सास की देखभाल से मुंह मोड़ना पड़ा महंगा, बुटीक संचालिका बहू को ₹10 हजार मासिक भरण पोषण देने का न्यायालय का आदेश

भरण पोषण अधिकरण एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तिल्दा रायपुर के द्वारा सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत एक आदेश पारित कर बेटे व बहू को अपनी बुजुर्ग मां के भरण पोषण के लिए ₹10000 मासिक की राशि देने का आदेश दिया l
रायपुर तिल्दा निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपनी बहू एवं बेटे की प्रताड़ना से तंग आकर may 2025 में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत एसडीएम तिल्दा में याचिका दायर की थी जिसमें भरण पोषण अधिकरण एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तिल्दा रायपुर के द्वारा बहू एवं पुत्र को भरण पोषण के लिए ₹10000 मासिक की राशि देने का आदेश दिया l
क्या था मामला
रायपुर तिल्दा के निवासी बुजुर्ग महिला ने अपने पुत्र (दीपक बत्रा) व बहू (वर्षा बत्रा) की प्रताड़ना से तंग आकर सीनियर सिटीजन अधिनियम के तहत वाद दायर किया था तथा बताया कि कोविङ काल में उनके पति की मृत्यु के बाद से उनके बेटे व बहू का व्यवहार बुजुर्ग महिला के प्रति अत्यंत ही बदल गया और आए दिन संपत्ति को लेकर विवाद करते रहते थे लड़ाई झगड़ा वगंदी गंदी गाली गलौज कर प्रताड़ित करते थे इसके संबंध में बुजुर्ग महिला द्वारा संबंधित थाने में शिकायत भी की गई थी साथ ही बुजुर्ग महिला के स्वास्थ्य एवं दैनिक मूलभूत वस्तुएं भी उपलब्ध नहीं करवाते थे ।
बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनका बेटा एक कारखाना चलता है व बहू बुटीक का कार्य करती है इस तरह दोनों अच्छा आय अर्जन करते हैं । उक्त के बावजूद भी दोनों पति-पत्नी बुजुर्ग महिला से आए दिन लड़ाई झगड़ा करते हैं व देखभाल भी नहीं करते हैं गंभीर बीमारी होने पर भी डॉक्टर के पास नहीं ले जाते हैं।
माननीय उच्च न्यायालय में दायर की थी याचिका
आवेदिका /बुजुर्ग महिला के द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमेश गंगवानी के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर प्रकरण की जल्द से जल्द सुनवाई कर निराकरण की मांग की थी जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने तिल्दा SDM राजस्व को निर्देश दिया था कि मामले को 15 दिवस के भीतर लंबित प्रकरण का निराकरण करें तत्पश्चात एसडीएम तिल्दा के द्वारा मामले का निराकरण कर बेटे व बहू को मेंटेनेंस राशि देने का आदेश पारित किया ।
न्यायालय ने पाया बुजुर्ग महिला के साथ हुई प्रताड़ना
न्यायालय ने बेटे व बहू को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनकर दोनों पक्षों को लिखित तर्क प्रस्तुत करने का समय दिया तत्पश्चात दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत बुजुर्गों को भरण पोषण मिलन उनके कानूनी अधिकार है वर्तमान प्रकरण में बुजुर्ग महिला की बहू और बेटे के द्वारा बुजुर्ग मां से आए दिन बाद बात पर लड़ते हैं तथा किसी भी प्रकार से कोई भी भरण पोषण की व्यवस्था नहीं करते हैं आवेदिका के पति के निधन के पश्चात बुजुर्ग मां से संपत्ति को लेकर आवेदिका से बात-बात पर विवाद करते हैं अवधिका के द्वारा अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया उसके बावजूद अनदर गुण अर्थात बहू ए बेटे बुजुर्ग मां के स्वस्थ का भी ध्यान नहीं रखते हैं इसके संबंध में अवैदिका ने महिला थाने में शिकायत दर्ज की थी परिणाम स्वरुप कोर्ट ने पाया कि बुजुर्ग महिला को बहू व बेटे के द्वारा ₹10000 मासिक भरण पोषण की राशि दिया जाना चाहिए ।
प्रताड़ना रोकनी है तो कानूनी हक्क का करें इस्तेमाल
अधिवक्ता रमेश गंगवानी ने बताया कि घर में अपने ही लोगों की प्रताड़ना से बचना है तो बुजुर्गो को जागरूक होना होगा। उन्हें वह कानून जानना होगा, जो सिर्फ उनके लिए है। ‘द मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007’ बुजुर्गो के अधिकारों की रक्षा करता है और सम्मान के साथ जीने की व्यवस्था करता है। ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनमें अपने ही बच्चों द्वारा प्रताड़ित होने के बाद इन बुजुर्गो को जीवन के अंतिम पड़ाव में सहायता के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे बुजुर्गो के लिए ‘द मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007’ कानून बनाया गया है। इससे हमारे बुजुर्ग अपने अधिकारों को सुरक्षित रख सकेंगे तथा प्रताड़ना की इन घटनाओं पर अंकुश भी लगेगा। जानकारी के अभाव में इस एक्ट के लाभ इन बुजुर्गो की पहुंच से बाहर हैं।एक्ट के तहत संतान को वृद्ध माता- पिता और दादा- दादी को उनके निवास, खान पान, स्वास्थ्य संबंधी समस्त उपचार- देखरेख सहित अन्य आवश्यक जरूरतों का खर्चा उठाना होगा।




