मध्य प्रदेशराज्‍य

मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियां तेज, राज्य स्तरीय कार्यशाला में जुटे अधिकारी

By Admin|01 Oct 2026, 9:37 PM
f X W

भोपाल

Advertisement
Advertisement

 प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली 6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के संबंध में आज एमपीआरडीसी मुख्यालय, भोपाल में प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। “Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान, उनके समाधान तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नवाचारों को साझा करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

एमपीआरडीसी के तकनीकी सलाहकार  आर.के. मेहरा ने स्वागत वक्तव्य में कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों के अनुरूप लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, आवश्यक अनुमतियों में होने वाले विलंब को कम करने तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उनके संबंध में नीति आयोग को फीडबैक फॉर्म के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सुगम बनाते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करना है।

कार्यशाला में वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक  एच.एस. मोहंता ने परिवेश पोर्टल, वन भूमि के व्यपवर्तन, ईको-सेंसिटिव जोन, जैव विविधता क्षेत्रों, अभयारण्य एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अनुमतियों से संबंधित प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने निर्माण परियोजनाओं के दौरान वृक्षारोपण से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए भी व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में भू-अर्जन, आरओडब्ल्यू/आरओयू, वन स्वीकृति, वन्यजीव स्वीकृति, यूटिलिटी शिफ्टिंग, राज्य स्तरीय अनुमतियां, निर्माण सामग्री एवं अन्य आवश्यक अनुमतियों से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

READ ALSO  मधेपुरा के किसानों पर बाढ़ की मार, 11 करोड़ से ज्यादा फसल नुकसान; अब मिलेगा मुआवजा

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न स्तरों पर आने वाली प्रक्रियात्मक एवं व्यावहारिक बाधाओं को चिन्हित कर उनके प्रभावी समाधान तलाशना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। साथ ही, परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए विचारों को साझा करने पर भी जोर दिया गया।

 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins