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CG : हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा अतिक्रमण मामले में याचिकाकर्ता को दी अंतरिम राहत …

By kadwaghut|06 Jun 2026, 12:36 PM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले के मिसदा ग्राम निवासी रामप्रसाद राही को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा है कि राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर निर्णय होने तक प्रशासन याचिकाकर्ता के खिलाफ अतिक्रमण हटाने या निर्माण तोड़ने जैसी कोई कार्रवाई नहीं करेगा। यह आदेश रामप्रसाद राही द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।

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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में 27 मई 2026 को जारी अतिक्रमण नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी। यह नोटिस नायब तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संबंध में जारी किया गया था। याचिकाकर्ता ने बताया कि बिलासपुर संभाग के आयुक्त ने 7 अप्रैल 2026 को अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत 1 जून 2026 को राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

रामप्रसाद राही ने बताया कि पुनरीक्षण याचिका के साथ अंतरिम स्थगन (स्टे) का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है, जिसकी सुनवाई अभी होना बाकी है। हालांकि स्थानीय राजस्व अधिकारी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रख रहे थे, जिससे याचिकाकर्ता को अपने निर्माण ध्वस्त होने और बेदखल किए जाने का खतरा था। राज्य शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि राजस्व मंडल में याचिकाकर्ता का मामला विचाराधीन है और स्थगन आवेदन की सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार शिवरीनारायण को स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए।

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अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपने पुनरीक्षण प्रकरण और स्थगन आवेदन की सुनवाई में सक्रिय रूप से सहयोग करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार लंबित आवेदन की सुनवाई और अंतरिम स्थगन पर आदेश मिलने तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना अनुचित होगा। इस आदेश से याचिकाकर्ता रामप्रसाद राही को अस्थायी सुरक्षा मिली है, जिससे उनकी संपत्ति और निर्माण सुरक्षित रह सके। उच्च न्यायालय के निर्देश से प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अवांछित कार्रवाई न की जाए।

राजस्व और भूमि विवादों में हाईकोर्ट की यह अंतरिम राहत राज्य में अतिक्रमण मामलों में न्यायिक संतुलन और याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा का उदाहरण है। विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालय का यह कदम याचिकाकर्ताओं को अपने अधिकारों की रक्षा करने का समय और अवसर प्रदान करता है। अदालत के आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राजस्व अधिकारियों को किसी भी कार्रवाई में धैर्य और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अदालत के आदेश से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है और वे पुनरीक्षण याचिका तथा स्थगन आवेदन की सुनवाई में पूरी तरह सहयोग करेंगे। यह मामला जांजगीर-चांपा जिले में अतिक्रमण और भूमि विवादों में उच्च न्यायालय की भूमिका को उजागर करता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए केवल लंबित मामलों के निस्तारण के बाद ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए।

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