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CG : बाल विवाह पर होगी कठोर कार्यवाही, 2 साल की सजा और 1 लाख जुर्माने का प्रावधान …

By kadwaghut|18 Jul 2026, 10:18 AM
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सूरजपुर। जिला कलेक्टर रेना जमील के निर्देश एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में जिले के समस्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बालिका शिक्षा, बाल विवाह की रोकथाम, बाल संरक्षण एवं अन्य सामाजिक विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, देवनगर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अभिभावकों ने सहभागिता निभाई।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक अभिशाप ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने, कराने, सहयोग करने अथवा उसमें शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए दो वर्ष तक के कारावास एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की कि बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही किया जाए तथा उससे पूर्व उन्हें शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

जायसवाल ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अनुचित स्पर्श, अश्लील इशारे, पीछा करना, अश्लील चित्र या वीडियो दिखाना अथवा रास्ता रोकने जैसी घटनाएं इस अधिनियम के अंतर्गत गंभीर एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने बालिकाओं से आग्रह किया कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दें।

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साइबर अपराधों के प्रति सचेत करते हुए जायसवाल ने कहा कि मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया का उपयोग आवश्यकतानुसार तथा अभिभावकों की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। उन्होंने फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाली ऑनलाइन ठगी एवं व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी। छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि टोनही जैसी अवधारणाएं पूर्णतः अंधविश्वास पर आधारित हैं तथा इस प्रकार की प्रताड़ना कानूनन दंडनीय एवं गैर-जमानती अपराध है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने एवं वैज्ञानिक सोच अपनाने का आह्वान किया। यातायात नियमों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि निर्धारित आयु पूर्ण होने एवं वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार का वाहन नहीं चलाना चाहिए, तथा नाबालिग द्वारा वाहन चलाने से दुर्घटना होने की स्थिति में वाहन स्वामी एवं अभिभावकों के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

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